यह मत जौँ मानहु प्रभु मोरा । उभय प्रकार सुजस जग तोरा ॥
सुत सन कह दसकंठ रिसाई । असि अति सठ केहिं तोहि सिखाई ॥
yaha mata jaum̐ mānahu prabhu morā | ubhaya prakāra sujasa jaga torā ||
suta sana kaha dasakaṃṭha risāī | asi ati saṭha kehiṃ tohi sikhāī ||
6 श्लोक · 10 में से 121
प्रहस्त कहता है कि यह मत मानिए तो दोनों ओर से संसार में सुयश रहेगा। रावण क्रोध में कहता है: अरे मूर्ख, तुझे ऐसी बुद्धि किसने सिखाई? अभी से तेरे मन में संशय होने लगा? तू अपने ही कुल का नाश करने वाला पुत्र निकला। पिता के कठोर वचन सुनकर प्रहस्त भी कड़वी बात कहकर घर चला जाता है। संध्या होने पर दशशीश अपनी बीस भुजाएँ निहारता हुआ लंका के शिखर पर बने अद्भुत भवन में जाता है। वहाँ किन्नर गुण गाते हैं, ताल, पखावज और वीणा बजती हैं, प्रवीण अप्सराएँ नृत्य करती हैं। वह सौ इन्द्रों के समान विलास करता है, और प्रबल शत्रु सिर पर होने पर भी उसके मन में तनिक भय नहीं।
यह मत जौँ मानहु प्रभु मोरा । उभय प्रकार सुजस जग तोरा ॥
सुत सन कह दसकंठ रिसाई । असि अति सठ केहिं तोहि सिखाई ॥
yaha mata jaum̐ mānahu prabhu morā | ubhaya prakāra sujasa jaga torā ||
suta sana kaha dasakaṃṭha risāī | asi ati saṭha kehiṃ tohi sikhāī ||
अबहीं ते उर संसय होई । बेनु-मूल सुत भयहु घमोई ॥
सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा । चला भवन कहि बचन कठोरा ॥
abahīṃ te ura saṃsaya hoī | benu-mūla suta bhayahu ghamoī ||
suni pitu girā paruṣa ati ghorā | calā bhavana kahi bacana kaṭhorā ||
हित मत तोहि न लागत कैसें । काल-बिबस कह भेषज जैसें ॥
सन्ध्या समय जानि दससीसा । भवन चलेउ निरखत भुज-बीसा ॥
hita mata tohi na lāgata kaiseṃ | kāla-bibasa kaha bheṣaja jaiseṃ ||
sandhyā samaya jāni dasasīsā | bhavana caleu nirakhata bhuja-bīsā ||
लङ्का सिखर उपर आगारा । अति-विचित्र तहँ होइ अखारा ॥
बैठ जाइ तेहि मन्दिर रावन । लागे किंनर गुन-गन-गावन ॥
laṅkā sikhara upara āgārā | ati-vicitra taham̐ hoi akhārā ||
baiṭha jāi tehi mandira rāvana | lāge kiṃnara guna-gana-gāvana ||
बाजहिँ ताल पखाउज बीना । नृत्य करहिँ अपछरा प्रबीना ॥
bājahim̐ tāla pakhāuja bīnā | nṛtya karahim̐ apacharā prabīnā ||
सुनासीर सत सरिस सो, सन्तत करइ बिलास ।
परम-प्रबल रिपु सीस पर, तद्यपि सोच न त्रास ॥
sunāsīra sata sarisa so, santata karai bilāsa |
parama-prabala ripu sīsa para, tadyapi soca na trāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0