काटत बढ़हिँ सीस समुदाई । जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई ॥
मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेखा । राम बिभीषन तन तब देखा ॥
kāṭata bar̤hahim̐ sīsa samudāī | jimi prati lābha lobha adhikāī ||
marai na ripu śrama bhayau bisekhā | rāma bibhīṣana tana taba dekhā ||
7 श्लोक · 102 में से 121
सिर काटने पर ऐसे बढ़ते हैं जैसे हर लाभ पर लोभ बढ़ता है। शत्रु को न मरते देख प्रभु विभीषण की ओर देखते हैं। शिवजी उमा से कहते हैं: जिनकी इच्छा से काल भी मर जाए, वे प्रभु सेवक की प्रीति की परीक्षा ले रहे थे। विभीषण कहते हैं: नाथ, इसकी नाभि के कुण्ड में अमृत है, उसी के बल पर रावण जीवित है। यह सुनकर कृपालु प्रभु हर्षित होकर कराल बाण उठाते हैं। अपशकुन होने लगते हैं: सियार और कुत्ते रोते हैं, केतु प्रकट होते हैं, बिना पर्व सूर्यग्रहण होता है, मन्दोदरी का हृदय काँपता है, मूर्तियाँ रोती हैं, बादल रक्त बरसाते हैं। देवताओं का समय जानकर प्रभु कान तक धनुष खींचकर इकतीस बाण छोड़ते हैं, जो काल के सर्पों जैसे चलते हैं।
काटत बढ़हिँ सीस समुदाई । जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई ॥
मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेखा । राम बिभीषन तन तब देखा ॥
kāṭata bar̤hahim̐ sīsa samudāī | jimi prati lābha lobha adhikāī ||
marai na ripu śrama bhayau bisekhā | rāma bibhīṣana tana taba dekhā ||
उमा काल मरु जा की ईछा । सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा ॥
सुनु सर्बज्ञ चराचर नायक । प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक ॥
umā kāla maru jā kī īchā | so prabhu jana kara prīti parīchā ||
sunu sarbajña carācara nāyaka | pranatapāla sura muni sukhadāyaka ||
नाभिकुंड पियूष बस याकें । नाथ जियत रावन बल ताकें ॥
सुनत बिभीषन बचन कृपाला । हरषि गहे कर बान कराला ॥
nābhikuṃḍa piyūṣa basa yākeṃ | nātha jiyata rāvana bala tākeṃ ||
sunata bibhīṣana bacana kṛpālā | haraṣi gahe kara bāna karālā ||
असुभ होन लागे तब नाना । रोवहिं खर सृकाल बहु खर-स्वाना ॥
बोलहिं खग जग आरति हेतू । प्रगट भये नभ जहँ तहँ केतू ॥
asubha hona lāge taba nānā | rovahiṃ khara sṛkāla bahu khara-svānā ||
bolahiṃ khaga jaga ārati hetū | pragaṭa bhaye nabha jaham̐ taham̐ ketū ||
दस-दिसि दाह होन अति लागा । भयउ परब बिनु रबि उपरागा ॥
मन्दोदरि उर कम्पति भारी । प्रतिमा सबहिं नयन-मग बारी ॥
dasa-disi dāha hona ati lāgā | bhayau paraba binu rabi uparāgā ||
mandodari ura kampati bhārī | pratimā sabahiṃ nayana-maga bārī ||
प्रतिमा रुदहिं पविपात नभ अति, बात वह डोलति मही ।
बरषहिँ बलाहक रुधिर कच रज, असुभ अति सक को कही ॥
उतपात अमित बिलोकि नभ सुर, बिकल बोलहिं जय जये ।
सुर सभय जानि कृपाल रघुपति, चाप सर जोरत भये ॥
pratimā rudahiṃ pavipāta nabha ati, bāta vaha ḍolati mahī |
baraṣahim̐ balāhaka rudhira kaca raja, asubha ati saka ko kahī ||
utapāta amita biloki nabha sura, bikala bolahiṃ jaya jaye |
sura sabhaya jāni kṛpāla raghupati, cāpa sara jorata bhaye ||
खैचि सरासन श्रवन लगि, छाड़े सर एकतीस ।
रघुनायक-सायक चले, मानहुँ काल फनीस ॥
khaici sarāsana śravana lagi, chār̤e sara ekatīsa |
raghunāyaka-sāyaka cale, mānahum̐ kāla phanīsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0