किष्किन्धाकाण्ड

अध्याय 4: अग्नि को साक्षी कर मित्रता

5 श्लोक · 4 में से 30

इस अध्याय में क्या होता है

अग्नि को साक्षी कर मित्रता

स्वामी को प्रसन्न देखकर पवनपुत्र का हृदय हर्षित होता है और सारी पीड़ा मिट जाती है। वे कहते हैं, नाथ, इस पर्वत पर वानरराज रहते हैं; वह सुग्रीव आपका दास है। उससे मित्रता कीजिए और उसे दीन जानकर अभय दीजिए। वह सीता की खोज कराएगा और करोड़ों वानरों को जहाँ-तहाँ भेजेगा। इस प्रकार सब बात समझाकर हनुमान दोनों भाइयों को पीठ पर चढ़ा लेते हैं। सुग्रीव जब श्रीराम को देखते हैं तो अपना जन्म अत्यन्त धन्य मानते हैं। वे आदर से चरणों में सिर नवाते हैं और रघुनाथ लक्ष्मण सहित उन्हें गले लगाते हैं। सुग्रीव मन में सोचते हैं कि क्या विधाता इनसे मेरी प्रीति कराएँगे। तब हनुमान दोनों ओर की पूरी कथा सुनाते हैं और अग्नि को साक्षी बनाकर दृढ़ मित्रता जोड़ देते हैं।

4.1

देखि पवन सुत पति अनुकूला । हृदयँ हरष बीती सब सूला ॥
नाथ सैल पर कपिपति रहई । सो सुग्रीव दास तव अहई ॥

dekhi pavana suta pati anukūlā | hṛdayam̐ haraṣa bītī saba sūlā ||
nātha saila para kapipati rahaī | so sugrīva dāsa tava ahaī ||

4.2

तेहि सन नाथ मयत्री कीजे । दीन जानि तेहि अभय करीजे ॥
सो सीता कर खोज कराइहि । जहँ तहँ मरकट कोटि पठाइहि ॥

tehi sana nātha mayatrī kīje | dīna jāni tehi abhaya karīje ||
so sītā kara khoja karāihi | jaham̐ taham̐ marakaṭa koṭi paṭhāihi ||

4.3

एहि बिधि सकल कथा समुझाई । लिये दुऔ जन पीठि चढ़ाई ॥
जब सुग्रीवँ राम कह देखा । अतिसय जनम धन्य करि लेखा ॥

ehi bidhi sakala kathā samujhāī | liye duau jana pīṭhi car̤hāī ||
jaba sugrīvam̐ rāma kaha dekhā | atisaya janama dhanya kari lekhā ||

4.4

सादर मिलेउ नाइ पद माथा । भैंटेउ अनुज सहित रघुनाथा ॥
कपि कर मन बिचार एहि रीती । करिहहिँ बिधि मो सन ये प्रीती ॥

sādara mileu nāi pada māthā | bhaiṃṭeu anuja sahita raghunāthā ||
kapi kara mana bicāra ehi rītī | karihahim̐ bidhi mo sana ye prītī ||

दो॰ 4दोहा

तब हनुमन्त उभय दिसि,-की सब कथा सुनाइ ।
पावक साखी देइ करि, जोरी प्रीति दृढाइ ॥

taba hanumanta ubhaya disi,-kī saba kathā sunāi |
pāvaka sākhī dei kari, jorī prīti dṛḍhāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0