किष्किन्धाकाण्ड

अध्याय 24: वन में प्यास और गुप्त गुफा

5 श्लोक · 24 में से 30

इस अध्याय में क्या होता है

वन में प्यास और गुप्त गुफा

कहीं राक्षस से भेंट हो जाती है तो वानर एक-एक थप्पड़ में उसके प्राण ले लेते हैं। कोई मुनि मिले तो सब उसे घेर लेते हैं। फिर उन्हें बहुत प्यास लगती है, जल नहीं मिलता और वे घने वन में भटक जाते हैं। हनुमान मन में अनुमान करते हैं कि बिना जल पिए सब मर जाएँगे। वे पर्वत की चोटी पर चढ़कर चारों ओर देखते हैं और एक अचरज देखते हैं: धरती में एक गुफा है, जिसके ऊपर चकवे, बगुले और हंस उड़ रहे हैं और बहुत से पक्षी उसमें घुस रहे हैं। हनुमान को आगे करके सब उसमें प्रवेश करते हैं। वहाँ वे सुन्दर उपवन, खिले कमलों वाला सरोवर और एक सुन्दर मन्दिर देखते हैं, जिसमें तप की मूर्ति-सी एक स्त्री बैठी है।

24.1

कतहुँ होइ निसिचर साँ भेटा । प्रान लेहिँ एक एक चपेटा ॥
बहु प्रकार गिरि कानन हेरहिं । कोउ मुनि मिलत ताहि सब घेरहिं ॥

katahum̐ hoi nisicara sām̐ bheṭā | prāna lehim̐ eka eka capeṭā ||
bahu prakāra giri kānana herahiṃ | kou muni milata tāhi saba gherahiṃ ||

24.2

लागि तृषा अतिसय अकुलाने । मिलइ न जल घन गहन भुलाने ॥
मन हनुमान कीन्ह अनुमाना । मरन चहत सब बिनु-जल-पाना ॥

lāgi tṛṣā atisaya akulāne | milai na jala ghana gahana bhulāne ||
mana hanumāna kīnha anumānā | marana cahata saba binu-jala-pānā ||

24.3

चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा । भूमि बिबिर एक कौतुक पेखा ॥
चक्रवाक बक हंस उड़ाहीं । बहुतक खग प्रबिसहिँ तेहि माहीं ॥

car̤hi giri sikhara cahūm̐ disi dekhā | bhūmi bibira eka kautuka pekhā ||
cakravāka baka haṃsa ur̤āhīṃ | bahutaka khaga prabisahim̐ tehi māhīṃ ||

24.4

गिरि ते उतरि पवन-सुत आवा । सब कह लेइ सोइ बिबर देखावा ॥
आगें करि हनुमन्तहि लीन्हा । पैठे बिबर बिलम्ब न कीन्हा ॥

giri te utari pavana-suta āvā | saba kaha lei soi bibara dekhāvā ||
āgeṃ kari hanumantahi līnhā | paiṭhe bibara bilamba na kīnhā ||

दो॰ 24दोहा

दीख जाइ उपबन बर, सर बिगसित बहु कञ्ज ।
मन्दिर एक रुचिर तहँ, बैठि नारि तप-पुञ्ज ॥

dīkha jāi upabana bara, sara bigasita bahu kañja |
mandira eka rucira taham̐, baiṭhi nāri tapa-puñja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0