जस दूलह तस बनी बराता । कौतुक बिबिध होहिँ मग जाता ॥
इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना । अति बिचित्र नहिँ जाइ बखाना ॥
jasa dūlaha tasa banī barātā | kautuka bibidha hohim̐ maga jātā ||
ihām̐ himācala raceu bitānā | ati bicitra nahim̐ jāi bakhānā ||
6 श्लोक · 94 में से 361
जैसा दूल्हा, वैसी बारात बनी, मार्ग में अनेक कौतुक होते जाते हैं। इधर हिमाचल ने ऐसा विचित्र मण्डप रचा जिसका वर्णन नहीं हो सकता। संसार के सब छोटे बड़े पर्वतों, वनों, समुद्रों, नदियों और तालाबों को न्योता भेजा गया। इच्छा से रूप धरने वाले वे सुन्दर शरीर धारण कर अपनी स्त्रियों और समाज सहित आए और प्रेम से मंगलगीत गाने लगे। गिरिराज ने पहले से सजाए घरों में सबको यथायोग्य ठहराया। नगर की शोभा देखकर ब्रह्मा की निपुणता भी छोटी लगती थी। बाग, कुएँ और नदियाँ सुन्दर थे, घर घर तोरण और पताकाएँ थीं, सुन्दर नर नारी मुनियों का मन भी मोहते थे। जहाँ जगदम्बा ने अवतार लिया, उस नगर का वर्णन कौन करे, वहाँ ऋद्धि, सिद्धि और सुख नित्य बढ़ते थे।
जस दूलह तस बनी बराता । कौतुक बिबिध होहिँ मग जाता ॥
इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना । अति बिचित्र नहिँ जाइ बखाना ॥
jasa dūlaha tasa banī barātā | kautuka bibidha hohim̐ maga jātā ||
ihām̐ himācala raceu bitānā | ati bicitra nahim̐ jāi bakhānā ||
सैल सकल जहँ लगि जग माहीँ । लघु बिसाल नहिँ बरनि सिराहीँ ॥
बन सागर सब नदीं तलावा । हिमगिरि सब कहँ नेवत पठावा ॥
saila sakala jaham̐ lagi jaga māhīm̐ | laghu bisāla nahim̐ barani sirāhīm̐ ||
bana sāgara saba nadīṃ talāvā | himagiri saba kaham̐ nevata paṭhāvā ||
कामरूप सुन्दर तनु धारी । सहित समाज सोह बर नारी ॥
आये सकल हिमाचल गेहा । गावहिँ मञ्जुर सहित सनेहा ॥
kāmarūpa sundara tanu dhārī | sahita samāja soha bara nārī ||
āye sakala himācala gehā | gāvahim̐ mañjura sahita sanehā ||
प्रथमहिँ गिरि बहु गृह सँवराये । जथाजोग जहँ तहँ सब छाये ॥
पुर-सोभा अवलोकि सुहाई । लागइ लघु बिरच्जि निपुनाई ॥
prathamahim̐ giri bahu gṛha sam̐varāye | jathājoga jaham̐ taham̐ saba chāye ||
pura-sobhā avaloki suhāī | lāgai laghu biracji nipunāī ||
लघु लागि बिधि की निपुनता, अवलोकि पुर सोभा सही ।
बन बाग कूप तड़ाग सरिता, सुभग सब सक को कही ॥
मङ्गल बिपुल तोरन पताका, केतु गृह गृह सोहहीँ ।
बनिता पुरुष सुन्दर चतुर छबि,-देखि मुनि मन मोहहीँ ॥
laghu lāgi bidhi kī nipunatā, avaloki pura sobhā sahī |
bana bāga kūpa tar̤āga saritā, subhaga saba saka ko kahī ||
maṅgala bipula torana patākā, ketu gṛha gṛha sohahīm̐ |
banitā puruṣa sundara catura chabi,-dekhi muni mana mohahīm̐ ||
जगदम्बा जहँ अवतरी, सो पुर बरनि कि जाइ ।
रिधि सिधि सम्पति सकल सुख, नित नूतन अधिकाइ ॥
jagadambā jaham̐ avatarī, so pura barani ki jāi |
ridhi sidhi sampati sakala sukha, nita nūtana adhikāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0