अजहूँ मानहु कहा हमारा । हम तुम्ह कहँ बर नीक बिचारा ॥
अति-सुन्दर सुचि सुखद सुसीला । गावहिँ बेद जासु जस लीला ॥
ajahūm̐ mānahu kahā hamārā | hama tumha kaham̐ bara nīka bicārā ||
ati-sundara suci sukhada susīlā | gāvahim̐ beda jāsu jasa līlā ||
5 श्लोक · 80 में से 361
ऋषि बोले, अब भी हमारी बात मानो। हमने तुम्हारे लिए अच्छा वर सोचा है जो दोषरहित, सब गुणों की राशि, वैकुण्ठवासी लक्ष्मीपति है। ऐसा वर हम लाकर तुमसे मिला देंगे। यह सुनकर भवानी हँसकर बोलीं, आपने सच कहा कि यह शरीर पर्वत से उपजा है। हठ नहीं छूटेगा, चाहे देह छूट जाए। सोना भी पत्थर से निकलता है, जलाने पर भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता। मैं नारद के वचन नहीं छोड़ूँगी, घर बसे या उजड़े, मुझे डर नहीं। जिसे गुरु के वचनों पर विश्वास नहीं, उसे सपने में भी सुख और सिद्धि सुलभ नहीं। महादेव अवगुणों के भवन हों और विष्णु सब गुणों के धाम, पर जिसका मन जिसमें रम जाए, उसे उसी से काम है।
अजहूँ मानहु कहा हमारा । हम तुम्ह कहँ बर नीक बिचारा ॥
अति-सुन्दर सुचि सुखद सुसीला । गावहिँ बेद जासु जस लीला ॥
ajahūm̐ mānahu kahā hamārā | hama tumha kaham̐ bara nīka bicārā ||
ati-sundara suci sukhada susīlā | gāvahim̐ beda jāsu jasa līlā ||
दूषन रहित सकल-गुन-रासी । श्रीपति पुर-बैकुंठ-निवासी ॥
अस बर तुम्हहिँ मिलाउब आनी । सुनत बिहँसि कह बचन भवानी ॥
dūṣana rahita sakala-guna-rāsī | śrīpati pura-baikuṃṭha-nivāsī ||
asa bara tumhahim̐ milāuba ānī | sunata biham̐si kaha bacana bhavānī ||
सत्य कहेहु गिरि-भव तनु एहा । हठ न छूट छूटै बरु देहा ॥
कनकउ पुनि पषान तेँ होई । जारेहुँ सहज न परिहर सोई ॥
satya kahehu giri-bhava tanu ehā | haṭha na chūṭa chūṭai baru dehā ||
kanakau puni paṣāna tem̐ hoī | jārehum̐ sahaja na parihara soī ||
नारद बचन न मैं परिहरऊँ । बसउ भवन उजरउ नहिँ डरऊँ ॥
गुरु कें बचन प्रतीति न जेही । सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही ॥
nārada bacana na maiṃ pariharaūm̐ | basau bhavana ujarau nahim̐ ḍaraūm̐ ||
guru keṃ bacana pratīti na jehī | sapanehum̐ sugama na sukha sidhi tehī ||
महादेव अवगुन भवन, बिष्नु सकल-गुन-धाम ।
जेहि कर मन रम जाहि सन, तेहि तेही सन काम ॥
mahādeva avaguna bhavana, biṣnu sakala-guna-dhāma |
jehi kara mana rama jāhi sana, tehi tehī sana kāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0