तदपि एक मैं कहउँ उपाई । होइ करइ जौँ दैव सहाई ॥
जस घर मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीँ । मिलिहि उमहि तस संसय नाहीँ ॥
tadapi eka maiṃ kahaum̐ upāī | hoi karai jaum̐ daiva sahāī ||
jasa ghara maiṃ baraneum̐ tumha pāhīm̐ | milihi umahi tasa saṃsaya nāhīm̐ ||
5 श्लोक · 69 में से 361
नारद बोले, फिर भी मैं एक उपाय कहता हूँ, यदि दैव सहायता करे तो सफल होगा। जैसा वर मैंने तुम्हें बताया, वैसा ही उमा को मिलेगा, इसमें संशय नहीं। वर के सब दोष मैंने शिव में देखे हैं। यदि शंकर से विवाह हो, तो सब लोग उन दोषों को भी गुण ही कहेंगे। हरि शेषनाग की शय्या पर सोते हैं, फिर भी ज्ञानी उन्हें दोष नहीं देते। सूर्य और अग्नि सब रसों को खा जाते हैं, उन्हें कोई बुरा नहीं कहता। गंगा में शुभ अशुभ सब जल बहता है, पर गंगा को कोई अपवित्र नहीं कहता। समर्थ को दोष नहीं लगता। पर विवेक के अभिमानी मनुष्य यदि ऐसी होड़ करें, तो कल्प भर नरक में पड़ते हैं, क्योंकि जीव ईश्वर के समान कैसे हो सकता है।
तदपि एक मैं कहउँ उपाई । होइ करइ जौँ दैव सहाई ॥
जस घर मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीँ । मिलिहि उमहि तस संसय नाहीँ ॥
tadapi eka maiṃ kahaum̐ upāī | hoi karai jaum̐ daiva sahāī ||
jasa ghara maiṃ baraneum̐ tumha pāhīm̐ | milihi umahi tasa saṃsaya nāhīm̐ ||
जे जे बर के दोष बखाने । ते सब सिव पहिँ मैं अनुमाने ॥
जौँ बिबाह सङ्कर सन होई । दोषउ गुन सम कह सब कोई ॥
je je bara ke doṣa bakhāne | te saba siva pahim̐ maiṃ anumāne ||
jaum̐ bibāha saṅkara sana hoī | doṣau guna sama kaha saba koī ||
जौँ अहि-सेज सयन हरि करहीं । बुध कछु तिन्ह कर दोष न धरहीँ ॥
भानु-कृसानु सर्ब-रस खाहीँ । तिन्ह कहँ मन्द कहत कोउ नाहीँ ॥
jaum̐ ahi-seja sayana hari karahīṃ | budha kachu tinha kara doṣa na dharahīm̐ ||
bhānu-kṛsānu sarba-rasa khāhīm̐ | tinha kaham̐ manda kahata kou nāhīm̐ ||
सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई । सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई ॥
समरथ कहँ नहिँ दोष गोसाँई । रवि पावक सुरसरि की नाँई ॥
subha aru asubha salila saba bahaī | surasari kou apunīta na kahaī ||
samaratha kaham̐ nahim̐ doṣa gosām̐ī | ravi pāvaka surasari kī nām̐ī ||
जौँ ऐसहि हिसिषा करहिँ, नर जड़ि विवेक अभिमान ।
परहिँ कलप भरि नरक महँ, जीव कि ईस समान ॥
jaum̐ aisahi hisiṣā karahim̐, nara jar̤i viveka abhimāna |
parahim̐ kalapa bhari naraka maham̐, jīva ki īsa samāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0