पिता-भवन जब गई भवानी । दच्छ-त्रास काहु न सनमानी ॥
सादर भलेहिं मिली एक माता । भगिनीं मिलीँ बहुत मुसुकाता ॥
pitā-bhavana jaba gaī bhavānī | daccha-trāsa kāhu na sanamānī ||
sādara bhalehiṃ milī eka mātā | bhaginīṃ milīm̐ bahuta musukātā ||
5 श्लोक · 63 में से 361
जब भवानी पिता के घर पहुँचीं, तो दक्ष के डर से किसी ने उनका सम्मान नहीं किया। केवल माता प्रेम से मिलीं, बहनें मुसकाती हुई मिलीं। दक्ष ने कुशल तक न पूछी, सती को देखकर उनका सारा शरीर जल उठा। तब सती ने जाकर यज्ञ देखा, कहीं भी शम्भु का भाग न दिखा। अब शंकर की कही बात मन में आई। स्वामी का अपमान समझकर हृदय जलने लगा, पति के त्याग का पहला दुःख भी ऐसा नहीं व्यापा था। संसार में अनेक कठोर दुःख हैं, पर अपने जन का अपमान सबसे कठिन है। माता ने बहुत समझाया, पर शिव का अपमान सहा न गया, मन शान्त न हुआ, और सारी सभा को हठपूर्वक रोककर सती क्रोध से बोलीं।
पिता-भवन जब गई भवानी । दच्छ-त्रास काहु न सनमानी ॥
सादर भलेहिं मिली एक माता । भगिनीं मिलीँ बहुत मुसुकाता ॥
pitā-bhavana jaba gaī bhavānī | daccha-trāsa kāhu na sanamānī ||
sādara bhalehiṃ milī eka mātā | bhaginīṃ milīm̐ bahuta musukātā ||
दच्छ न कछु पूछी कुसलाता । सतिहि बिलोकि जरे सब गाता ॥
सतीं जाइ देखेउ तब जागा । कतहुँ न दीख सम्भु कर भागा ॥
daccha na kachu pūchī kusalātā | satihi biloki jare saba gātā ||
satīṃ jāi dekheu taba jāgā | katahum̐ na dīkha sambhu kara bhāgā ||
तब चित चढ़ेउ जो सङ्कर कहेऊ । प्रभु-अपमान समुझि उर दहेऊ ॥
पाछिल दुख न हृदयँ अस ब्यापा । जस यह भयउ महा परितापा ॥
taba cita car̤heu jo saṅkara kaheū | prabhu-apamāna samujhi ura daheū ||
pāchila dukha na hṛdayam̐ asa byāpā | jasa yaha bhayau mahā paritāpā ||
जद्यपि जग दारुन दुख नाना । सब तेँ कठिन जाति-अपमाना ॥
समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा । बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा ॥
jadyapi jaga dāruna dukha nānā | saba tem̐ kaṭhina jāti-apamānā ||
samujhi so satihi bhayau ati krodhā | bahu bidhi jananīṃ kīnha prabodhā ||
सिव अपमान न जाइ सहि, हृदयँ न होइ प्रबोध ।
सकल सभहि हठि हटकि तब, बोलीं बचन सक्रोध ॥
siva apamāna na jāi sahi, hṛdayam̐ na hoi prabodha |
sakala sabhahi haṭhi haṭaki taba, bolīṃ bacana sakrodha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0