बालकाण्ड

अध्याय 351: सबको दान, बाराती अपने घर गए

5 श्लोक · 351 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सबको दान, बाराती अपने घर गए

माताएँ विधिपूर्वक देवताओं और पितरों का पूजन करती हैं और उनके मन की सब कामनाएँ पूरी होती हैं। सबको प्रणाम करके वे एक ही वर माँगती हैं, भाइयों सहित श्रीराम का कल्याण। देवता अदृश्य रहकर आशीर्वाद देते हैं और माताएँ प्रसन्न होकर उसे आँचल भर लेती हैं। राजा बारातियों को बुलाकर सवारियाँ, वस्त्र, मणि और गहने देते हैं। आज्ञा पाकर वे श्रीराम को हृदय में रखकर प्रसन्न मन से अपने अपने घर जाते हैं। नगर के सब नर नारियों को वस्त्र पहनाए जाते हैं और घर घर बधाई के बाजे बजने लगते हैं। याचक जो जो माँगते हैं, राजा प्रसन्न होकर वही देते हैं। तब राजा गुरु और ब्राह्मणों सहित महल में जाते हैं।

351.1

देव पितर पूजे बिधि नीकी । पूजीं सकल बासना जी की ॥
सबहिँ बन्दि मागहिं बरदाना । भाइन्ह सहित राम कल्याना ॥

deva pitara pūje bidhi nīkī | pūjīṃ sakala bāsanā jī kī ||
sabahim̐ bandi māgahiṃ baradānā | bhāinha sahita rāma kalyānā ||

351.2

अन्तरहित सुर आसिष देहीं । मुदित मातु अञ्चल भरि लेंहीं ॥
भूपति बोलि बराती लीन्हे । जान बसन मनि भूषन दीन्हे ॥

antarahita sura āsiṣa dehīṃ | mudita mātu añcala bhari leṃhīṃ ||
bhūpati boli barātī līnhe | jāna basana mani bhūṣana dīnhe ||

351.3

आयसु पाइ राखि उर रामहि । मुदित गये सब निज निज धामहि ॥
पुर नर नारि सकल पहिराये । घर घर बाजन लगे बधाये ॥

āyasu pāi rākhi ura rāmahi | mudita gaye saba nija nija dhāmahi ||
pura nara nāri sakala pahirāye | ghara ghara bājana lage badhāye ||

351.4

जाचक-जन जाचहिँ जोइ जोई । प्रमुदित राउ देहिँ सोइ सोई ॥
सेवक सकल बजनिआ नाना । पूरन किये दान सनमाना ॥

jācaka-jana jācahim̐ joi joī | pramudita rāu dehim̐ soi soī ||
sevaka sakala bajaniā nānā | pūrana kiye dāna sanamānā ||

दो॰ 351दोहा

देहि असीस जोहारि सब, गावहिँ गुन-गन-गाथ ।
तब गुरु भूसुर सहित गृहँ, गवन कीन्ह नरनाथ ॥

dehi asīsa johāri saba, gāvahim̐ guna-gana-gātha |
taba guru bhūsura sahita gṛham̐, gavana kīnha naranātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0