बालकाण्ड

अध्याय 346: माताओं ने परछन का साज सजाया

5 श्लोक · 346 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

माताओं ने परछन का साज सजाया

आनंद में डूबी सब माताओं के शरीर शिथिल हो गए हैं, पैर आगे नहीं बढ़ते। श्रीराम के दर्शन की प्रबल लालसा से वे परछन का साज सजाने लगती हैं। अनेक प्रकार के बाजे बजते हैं और सुमित्रा प्रसन्न होकर मंगल वस्तुएँ सजाती हैं: हल्दी, दूब, दही, पल्लव, फूल, पान, सुपारी, अक्षत, अंकुर, गोरोचन, लावा और तुलसी की सुंदर मंजरी। चित्रित सोने के कलश ऐसे सुहाते हैं मानो कामदेव के पक्षियों ने घोंसले बनाए हों। शकुन की वस्तुओं की सुगंध कही नहीं जाती। सब रानियाँ मंगल साज सजाती हैं, अनेक प्रकार की आरतियाँ बनाती हैं और प्रसन्न होकर मधुर मंगलगीत गाती हैं। कमल जैसे हाथों में मंगल वस्तुओं से भरे सोने के थाल लेकर माताएँ परछन करने चलती हैं, उनके शरीर पुलक से भरे हैं।

346.1

मोद प्रमोद बिबस सब माता । चलहिँ न चरन सिथिल भए गाता ॥
राम-दरस हित अति अनुरागीँ । परिछनि साज सजन सब लागीँ ॥

moda pramoda bibasa saba mātā | calahim̐ na carana sithila bhae gātā ||
rāma-darasa hita ati anurāgīm̐ | parichani sāja sajana saba lāgīm̐ ||

346.2

बिबिध बिधान बाजने बाजे । मङ्गल मुदित सुमित्राँ साजे ॥
हरद दूब दधि पल्लव फूला । पान पूगफल मङ्गल-मूला ॥

bibidha bidhāna bājane bāje | maṅgala mudita sumitrām̐ sāje ||
harada dūba dadhi pallava phūlā | pāna pūgaphala maṅgala-mūlā ||

346.3

अच्छत अङ्कुर लोचन लाजा । मञ्जुल मञ्जरि तुलसि बिराजा ॥
छुहे पुरट-घट सहज सुहाये । मदन-सकुन जनु नीड़ बनाये ॥

acchata aṅkura locana lājā | mañjula mañjari tulasi birājā ||
chuhe puraṭa-ghaṭa sahaja suhāye | madana-sakuna janu nīr̤a banāye ||

346.4

सगुन सुंगध न जाइ बखानी । मङ्गल सकल सजहिँ सब रानी ॥
रचीं आरतीं बहुत विधाना । मुदित करहिँ कल मङ्गल गाना ॥

saguna suṃgadha na jāi bakhānī | maṅgala sakala sajahim̐ saba rānī ||
racīṃ āratīṃ bahuta vidhānā | mudita karahim̐ kala maṅgala gānā ||

दो॰ 346दोहा

कनक थार भरि मङ्गलन्हि, कमल-करन्हि लिएँ मातु ।
चलीँ मुदित परिछनि करन, पुलक पल्लवित गात ॥

kanaka thāra bhari maṅgalanhi, kamala-karanhi liem̐ mātu |
calīm̐ mudita parichani karana, pulaka pallavita gāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0