भूप भवन तेहि अवसर सोहा । रचना देखि मदन मन मोहा ॥
मङ्गल सगुन मनोहरताई । रिधि सिधि सुख सम्पदा सुहाई ॥
bhūpa bhavana tehi avasara sohā | racanā dekhi madana mana mohā ||
maṅgala saguna manoharatāī | ridhi sidhi sukha sampadā suhāī ||
5 श्लोक · 345 में से 361
उस समय राजा दशरथ का भवन ऐसा शोभता है कि उसकी रचना देखकर कामदेव का मन भी मोहित हो जाता है। मंगल, शकुन, ऋद्धि, सिद्धि, सुख और संपदा मानो देह धर धरकर अपने आप दशरथ के घर आ गए हों। सुहागिनें झुंड की झुंड चल पड़ती हैं, जिनकी शोभा रति को भी लजाती है। वे आरती और सब मंगल वस्तुएँ सजाकर ऐसे गाती हैं मानो सरस्वती अनेक वेष धरकर गा रही हों। राजभवन आनंद के कोलाहल से भर जाता है। कौसल्या आदि श्रीराम की माताएँ प्रेम में अपने शरीर की सुध भूल जाती हैं। वे ब्राह्मणों को बहुत दान देती हैं और गणेश व त्रिपुरारि शिव का पूजन करती हैं, ऐसी प्रसन्न मानो परम दरिद्र को चारों पदार्थ मिल गए हों।
भूप भवन तेहि अवसर सोहा । रचना देखि मदन मन मोहा ॥
मङ्गल सगुन मनोहरताई । रिधि सिधि सुख सम्पदा सुहाई ॥
bhūpa bhavana tehi avasara sohā | racanā dekhi madana mana mohā ||
maṅgala saguna manoharatāī | ridhi sidhi sukha sampadā suhāī ||
जनु उछाह सब सहज सुहाये । तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ आये ॥
देखन हेतु राम वैदेही । कहहु लालसा होइ न केही ॥
janu uchāha saba sahaja suhāye | tanu dhari dhari dasaratha dasaratha gṛham̐ āye ||
dekhana hetu rāma vaidehī | kahahu lālasā hoi na kehī ||
जुथ जूथ मिलि चलीँ सुआसिनि । निज छबि निदरहिँ मदन-बिलासनि ॥
सकल सुमङ्गल सजें आरती । गावहिँ जनु बहु बेष भारती ॥
jutha jūtha mili calīm̐ suāsini | nija chabi nidarahim̐ madana-bilāsani ||
sakala sumaṅgala sajeṃ āratī | gāvahim̐ janu bahu beṣa bhāratī ||
भूपति भवन कोलाहल होई । जाइ न बरनि समउ सुख सोई ॥
कौसल्यादि राम महतारीं । प्रेम-बिबस तनु दसा बिसारीं ॥
bhūpati bhavana kolāhala hoī | jāi na barani samau sukha soī ||
kausalyādi rāma mahatārīṃ | prema-bibasa tanu dasā bisārīṃ ||
दिये दान बिप्रन्ह बिपुल, पूजि गनेस पुरारि ।
प्रमुदित परम दरिद्र जनु, पाइ पदारथ चारि ॥
diye dāna bipranha bipula, pūji ganesa purāri |
pramudita parama daridra janu, pāi padāratha cāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0