हने निसान पनव बर बाजे । भेरि सङ्ख धुनि हय गय गाजे ॥
झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई । सरस-राग बाजहिं सहनाई ॥
hane nisāna panava bara bāje | bheri saṅkha dhuni haya gaya gāje ||
jhām̐jhi birava ḍiṃḍamīṃ suhāī | sarasa-rāga bājahiṃ sahanāī ||
5 श्लोक · 344 में से 361
नगाड़े, ढोल, भेरी और शंख बजते हैं, घोड़े हिनहिनाते और हाथी चिंघाड़ते हैं, झाँझ और डमरू बजते हैं, और शहनाई मधुर राग छेड़ती है। बारात आती सुनकर पुरवासी प्रसन्न होते हैं, सबके शरीर पुलकित हो जाते हैं। सब अपने अपने सुंदर घर सजाते हैं, और बाजार, रास्ते, चौराहे और नगर के द्वार सँवारे जाते हैं। सारी गलियाँ सुगंधित अरगजे से सींची जाती हैं और जहाँ तहाँ सुंदर चौक पूरे जाते हैं। तोरण, ध्वजा, पताका और चँदोवों से सजे बाजार का वर्णन नहीं हो सकता। फलों से लदे सुपारी, केले और आम के पेड़, बकुल, कदंब और तमाल रोपे जाते हैं, जिनके थाँवले मणियों से बने हैं। घर घर मंगल कलश सजाए जाते हैं, और रघुवर की पुरी को देखकर ब्रह्मा आदि देवता भी ललचाते हैं।
हने निसान पनव बर बाजे । भेरि सङ्ख धुनि हय गय गाजे ॥
झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई । सरस-राग बाजहिं सहनाई ॥
hane nisāna panava bara bāje | bheri saṅkha dhuni haya gaya gāje ||
jhām̐jhi birava ḍiṃḍamīṃ suhāī | sarasa-rāga bājahiṃ sahanāī ||
पुर जन आवत अकनि बराता । मुदित सकल पुलकावलि गाता ॥
निज निज सुन्दर सदन सँवारे । हाट बाट चौहट पुर द्वारे ॥
pura jana āvata akani barātā | mudita sakala pulakāvali gātā ||
nija nija sundara sadana sam̐vāre | hāṭa bāṭa cauhaṭa pura dvāre ||
गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई । जहँ तहँ चौकें चारु पुराई ॥
बना बजार न जाइ बखाना । तोरन केतु पताक बिताना ॥
galīṃ sakala aragajām̐ siṃcāī | jaham̐ taham̐ caukeṃ cāru purāī ||
banā bajāra na jāi bakhānā | torana ketu patāka bitānā ||
सफल पूगफल कदलि रसाला । रोपे बकुल कदम्ब तमाला ॥
लगे सुभग तरु परसत धरनी । मनि-मयं आलबाल कल करनी ॥
saphala pūgaphala kadali rasālā | rope bakula kadamba tamālā ||
lage subhaga taru parasata dharanī | mani-mayaṃ ālabāla kala karanī ||
बिबिध भाँति मङ्गल कलस, गृह गृह रचे सँवारि ।
सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब, रघुबर-पुरी निहारि ॥
bibidha bhām̐ti maṅgala kalasa, gṛha gṛha race sam̐vāri |
sura brahmādi sihāhiṃ saba, raghubara-purī nihāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0