बालकाण्ड

अध्याय 34: रामनवमी को अयोध्या में आरम्भ

5 श्लोक · 34 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

रामनवमी को अयोध्या में आरम्भ

संशय मिटाकर तुलसीदास गुरु के चरणों की धूल सिर पर रखते हैं, सबको प्रणाम करते हैं जिससे कथा में दोष न लगे, और शिव को सिर नवाते हैं। वे तिथि बताते हैं: संवत सोलह सौ इकतीस, चैत्र की नवमी, मंगलवार को अयोध्या में यह चरित प्रकाशित हुआ। जिस दिन वेद राम का जन्म गाते हैं, उस दिन सब तीर्थ वहाँ आते हैं, और असुर, नाग, पक्षी, मनुष्य, मुनि और देवता रघुनायक की सेवा करने आते हैं। ज्ञानी जन्म का उत्सव मनाते हैं और कीर्ति गाते हैं। दोहा कहता है कि सज्जनों के झुण्ड सरयू में नहाते हैं और श्याम सुन्दर रूप का ध्यान करके राम नाम जपते हैं।

34.1

एहि बिधि सब संसय करि दूरी । सिर धरि गुरु पद पङ्कज धूरी ॥
पुनि सबही प्रनवउँ कर जोरी । करत कथा जेहिं लाग न खोरी ॥

ehi bidhi saba saṃsaya kari dūrī | sira dhari guru pada paṅkaja dhūrī ||
puni sabahī pranavaum̐ kara jorī | karata kathā jehiṃ lāga na khorī ||

34.2

सादर सिवहि नाइ अब माथा । बरनउँ बिसद राम गुन गाथा ॥
सम्बत सोरह सै एकतीसा । करउँ कथा हरि पद धरि सीसा ॥

sādara sivahi nāi aba māthā | baranaum̐ bisada rāma guna gāthā ||
sambata soraha sai ekatīsā | karaum̐ kathā hari pada dhari sīsā ||

34.3

नौमी भौम बार मधु मासा । अवधपुरीं यह चरित प्रकासा ॥
जेहि दिन राम जनम स्रुति गावहिँ । तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिँ ॥

naumī bhauma bāra madhu māsā | avadhapurīṃ yaha carita prakāsā ||
jehi dina rāma janama sruti gāvahim̐ | tīratha sakala tahām̐ cali āvahim̐ ||

34.4

असुर नाग खग नर मुनि देवा । आइ करहिँ रघुनायक सेवा ॥
जन्म महोत्सव रचहिँ सुजाना । करहिं राम कल कीरति गाना ॥

asura nāga khaga nara muni devā | āi karahim̐ raghunāyaka sevā ||
janma mahotsava racahim̐ sujānā | karahiṃ rāma kala kīrati gānā ||

दो॰ 34दोहा

मज्जहिँ सज्जन बृन्द बहु, पावन सरजू नीर ।
जपहिँ राम धरि ध्यान उर, सुन्दर स्याम सरीर ॥

majjahim̐ sajjana bṛnda bahu, pāvana sarajū nīra |
japahim̐ rāma dhari dhyāna ura, sundara syāma sarīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0