सुक सारिका जानकी ज्याये । कनक-पिंजरन्हि राखि पढ़ाये ॥
व्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही । सुनि धीरज परिहरइ न केही ॥
suka sārikā jānakī jyāye | kanaka-piṃjaranhi rākhi par̤hāye ||
vyākula kahahiṃ kahām̐ baidehī | suni dhīraja pariharai na kehī ||
5 श्लोक · 338 में से 361
सीता ने जिन तोतों और मैनाओं को पाला था और सोने के पिंजरों में रखकर बोलना सिखाया था, वे व्याकुल होकर पूछते हैं कि वैदेही कहाँ हैं। यह सुनकर किसका धीरज न छूटे। पक्षियों की यह दशा है, तो मनुष्यों की क्या कहें। तब भाई सहित जनक आते हैं, प्रेम से उनकी आँखें भर आई हैं। जो परम वैरागी कहलाते थे, सीता को देखते ही उनका धीरज भाग जाता है। वे जानकी को हृदय से लगा लेते हैं और ज्ञान की बड़ी मर्यादा टूट जाती है। चतुर मंत्री समझाने लगते हैं, फिर सोचते हैं कि यह समझाने का अवसर नहीं। बार बार बेटी को हृदय से लगाकर राजा सुंदर पालकियाँ मँगवाते हैं। शुभ लग्न जानकर, सिद्धिदाता गणेश का स्मरण करके वे कुमारियों को पालकियों में बैठाते हैं।
सुक सारिका जानकी ज्याये । कनक-पिंजरन्हि राखि पढ़ाये ॥
व्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही । सुनि धीरज परिहरइ न केही ॥
suka sārikā jānakī jyāye | kanaka-piṃjaranhi rākhi par̤hāye ||
vyākula kahahiṃ kahām̐ baidehī | suni dhīraja pariharai na kehī ||
भये विकल खग मृग एहि भाँती । मनुज दसा कैसें कहि जाती ॥
बन्धु समेत जनक तब आये । प्रेम उमगि लोचन जल छाये ॥
bhaye vikala khaga mṛga ehi bhām̐tī | manuja dasā kaiseṃ kahi jātī ||
bandhu sameta janaka taba āye | prema umagi locana jala chāye ||
सीय बिलोकि धीरता भागी । रहे कहावत परम-बिरागी ॥
लीन्हि राय उर लाइ जानकी । मिटी महा-मरजाद ज्ञान की ॥
sīya biloki dhīratā bhāgī | rahe kahāvata parama-birāgī ||
līnhi rāya ura lāi jānakī | miṭī mahā-marajāda jñāna kī ||
समुझावत सब सचिव सयाने । कीन्ह विचार, न अवसर जाने ॥
बारहिँ बार सुता उर लाई । सजि सुन्दर पालकीं मगाई ॥
samujhāvata saba saciva sayāne | kīnha vicāra, na avasara jāne ||
bārahim̐ bāra sutā ura lāī | saji sundara pālakīṃ magāī ||
प्रेम-बिबस परिवार सब, जानि सुलगन नरेस ।
कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह, सुमिरे सिद्ध गनेस ॥
prema-bibasa parivāra saba, jāni sulagana naresa |
kum̐ari car̤hāī pālakinha, sumire siddha ganesa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0