बालकाण्ड

अध्याय 334: विदा होती बेटियों को माताओं की सीख

5 श्लोक · 334 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विदा होती बेटियों को माताओं की सीख

सारी तैयारी करके जनक सब सामान अवधपुरी भेज देते हैं। बारात जाने की बात सुनकर रानियाँ ऐसी व्याकुल हो जाती हैं जैसे थोड़े जल में मछलियाँ। वे बार बार सीता को गोद में लेकर आशीष और सीख देती हैं: सदा पति की प्यारी रहना, तुम्हारा सुहाग अटल रहे, यही हमारा आशीर्वाद है। सास, ससुर और गुरु की सेवा करना, और पति का रुख देखकर उनकी आज्ञा मानना। स्नेह में डूबी चतुर सखियाँ कोमल वाणी से नारीधर्म सिखाती हैं। रानियाँ चारों कुमारियों को आदर से समझाकर बार बार हृदय से लगाती हैं और कहती हैं कि विधाता ने स्त्री को क्यों रचा। उसी समय सूर्यकुल की पताका श्रीराम भाइयों सहित प्रसन्न मन से विदा कराने जनक के महल की ओर चलते हैं।

334.1

सब समाज एहि भाँति बनाई । जनक अवधपुर दीन्ह पठाई ॥
चलिहि बरात सुनत सब रानीं । विकलमीन-गन जनु लघु पानीं ॥

saba samāja ehi bhām̐ti banāī | janaka avadhapura dīnha paṭhāī ||
calihi barāta sunata saba rānīṃ | vikalamīna-gana janu laghu pānīṃ ||

334.2

पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं । देह असीस सिखावन देहीं ॥
होएहु सन्तत पियहि पियारी । चिर अहिवात असीस हमारी ॥

puni puni sīya goda kari lehīṃ | deha asīsa sikhāvana dehīṃ ||
hoehu santata piyahi piyārī | cira ahivāta asīsa hamārī ||

334.3

सासु ससुर गुरु सेवा करेहू । पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू ॥
अति सनेह बस सखीं सयानी । नारि-धरम सिखवहिं मृदु-बानी ॥

sāsu sasura guru sevā karehū | pati rukha lakhi āyasu anusarehū ||
ati saneha basa sakhīṃ sayānī | nāri-dharama sikhavahiṃ mṛdu-bānī ||

334.4

सादर सकल कुँअरि समुझाई । रानिन्ह बार बार उर लाई ॥
बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं । कहहिँ बिरञ्चि रचीं कत नारीं ॥

sādara sakala kum̐ari samujhāī | rāninha bāra bāra ura lāī ||
bahuri bahuri bheṭahiṃ mahatārīṃ | kahahim̐ birañci racīṃ kata nārīṃ ||

दो॰ 334दोहा

तेहि अवसर भाइन्ह सहित, राम-भानु कुल-केतु ।
चले जनक-मन्दिर मुदित, बिदा करावन हेतु ॥

tehi avasara bhāinha sahita, rāma-bhānu kula-ketu |
cale janaka-mandira mudita, bidā karāvana hetu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0