पुरबासी सुनि चलिहि बराता । पूछत विकल परसपर बाता ॥
सत्य गवन सुनि सब बिलखाने । मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने ॥
purabāsī suni calihi barātā | pūchata vikala parasapara bātā ||
satya gavana suni saba bilakhāne | manahum̐ sām̐jha sarasija sakucāne ||
5 श्लोक · 333 में से 361
जनकपुर के लोग सुनते हैं कि बारात जाएगी, तो व्याकुल होकर एक दूसरे से पूछते हैं। जाना सच जानकर वे ऐसे उदास हो जाते हैं जैसे साँझ होने पर कमल सिकुड़ जाते हैं। आते समय बारात जहाँ जहाँ ठहरी थी, वहाँ वहाँ जनक अनेक प्रकार का पका भोजन, मेवे और पकवान भेजते हैं, जिन्हें अनगिनत कहार और बैल ढोते हैं। साथ ही वे एक लाख घोड़े, नख से शिख तक सजे पच्चीस हजार रथ और ऐसे दस हजार मतवाले हाथी भेजते हैं जिन्हें देखकर दिग्गज लजा जाएँ। सोने, वस्त्र और मणियों से भरी गाड़ियाँ, भैंसें, गौएँ और नाना वस्तुएँ भी जाती हैं। विदेह फिर से इतना अपार दहेज देते हैं कि उसे देखकर लोकपालों को भी अपने लोकों की संपदा थोड़ी लगती है।
पुरबासी सुनि चलिहि बराता । पूछत विकल परसपर बाता ॥
सत्य गवन सुनि सब बिलखाने । मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने ॥
purabāsī suni calihi barātā | pūchata vikala parasapara bātā ||
satya gavana suni saba bilakhāne | manahum̐ sām̐jha sarasija sakucāne ||
जहँ जहँ आवत बसे बराती । तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती ॥
बिबिध भाँति मेवा पकवाना । भोजन साजु न जाइ बखाना ॥
jaham̐ jaham̐ āvata base barātī | taham̐ taham̐ siddha calā bahu bhām̐tī ||
bibidha bhām̐ti mevā pakavānā | bhojana sāju na jāi bakhānā ||
भरि भरि बसहँ अपार कहारा । पठई जनक अनेक सुसारा ॥
तुरग-लाख रथ-सहस-पचीसा । सकल सँवारे नख अरु सीसा ॥
bhari bhari basaham̐ apāra kahārā | paṭhaī janaka aneka susārā ||
turaga-lākha ratha-sahasa-pacīsā | sakala sam̐vāre nakha aru sīsā ||
मत्त सहस दस सिन्धुर साजे । जिन्हहिं देखि दिसि-कुञ्जर लाजे ॥
कनक बसन मनि भरि भरि जाना । महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना ॥
matta sahasa dasa sindhura sāje | jinhahiṃ dekhi disi-kuñjara lāje ||
kanaka basana mani bhari bhari jānā | mahiṣīṃ dhenu bastu bidhi nānā ||
दाइज अमित न सकिअ कहि, दीन्ह बिदेहँ बहोरि ।
जो अवलोकत लोकपति, लोक सम्पदा थोरि ॥
dāija amita na sakia kahi, dīnha bideham̐ bahori |
jo avalokata lokapati, loka sampadā thori ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0