नयन नीर हठि मङ्गल जानी । परिछनि करहिं मुदित मन रानी ॥
बेद बिदित अरु कुल आचारू । कीन्ह भली बिधि सब व्यवहारू ॥
nayana nīra haṭhi maṅgala jānī | parichani karahiṃ mudita mana rānī ||
beda bidita aru kula ācārū | kīnha bhalī bidhi saba vyavahārū ||
6 श्लोक · 319 में से 361
मंगल का अवसर जानकर रानी आँसू रोक लेती हैं और प्रसन्न मन से परछन करती हैं। वेद की रीति और कुल का आचार, दोनों भली प्रकार निभाए जाते हैं। पंचशब्द बजते हैं, मार्ग में पाँवड़े बिछते हैं, और आरती व अर्घ्य के बाद श्रीराम मंडप में जाते हैं। दशरथ अपने समाज सहित ऐसे वैभव से विराजते हैं कि लोकपाल लजा जाते हैं। देवता फूल बरसाते हैं, ब्राह्मण शांतिपाठ करते हैं, और इतना कोलाहल है कि किसी को अपनी पराई बात सुनाई नहीं देती। श्रीराम को अर्घ्य देकर आसन पर बैठाया जाता है। स्त्रियाँ आरती उतारकर मणि, वस्त्र और गहने न्योछावर करती हैं। ब्रह्मा आदि देवता ब्राह्मण वेष में यह कौतुक देखकर जीवन सफल मानते हैं। नाई, बारी, भाट और नट न्योछावर पाकर आशीष देते हैं।
नयन नीर हठि मङ्गल जानी । परिछनि करहिं मुदित मन रानी ॥
बेद बिदित अरु कुल आचारू । कीन्ह भली बिधि सब व्यवहारू ॥
nayana nīra haṭhi maṅgala jānī | parichani karahiṃ mudita mana rānī ||
beda bidita aru kula ācārū | kīnha bhalī bidhi saba vyavahārū ||
पञ्च-सबद धुनि-मङ्गल-गाना । पट पाँवड़े परहिँ बिधि नाना ॥
करि आरती अरघ तिन्ह दीन्हा । राम गवन मंडप तब कीन्हा ॥
pañca-sabada dhuni-maṅgala-gānā | paṭa pām̐var̤e parahim̐ bidhi nānā ||
kari āratī aragha tinha dīnhā | rāma gavana maṃḍapa taba kīnhā ||
दसरथ सहित समाज बिराजे । विभव बिलोकि लोकपति लाजे ॥
समयँ समयँ सुर बरषहिँ फूला । सान्ति पढ़हिँ महिसुर अनुकूला ॥
dasaratha sahita samāja birāje | vibhava biloki lokapati lāje ||
samayam̐ samayam̐ sura baraṣahim̐ phūlā | sānti par̤hahim̐ mahisura anukūlā ||
नभ अरु नगर कोलाहल होई । आपनि पर कछु सुनइ न कोई ॥
एहि बिधि राम मंडपहिं आये । अरघ देइ आसन बैठाये ॥
nabha aru nagara kolāhala hoī | āpani para kachu sunai na koī ||
ehi bidhi rāma maṃḍapahiṃ āye | aragha dei āsana baiṭhāye ||
बैठारि आसन आरती करि, निरखि बर सुख पावहीं ।
मनि बसन भूषन भूरि वारहिं नारि मङ्गल गावहीँ ॥
ब्रह्मादि सुरबर विप्र बेष बनाइ कौतुक देखहीं ।
अवलोकि रघुकुल-कमल-रबि-छवि, सुफल जीवन लेखहीं ॥
baiṭhāri āsana āratī kari, nirakhi bara sukha pāvahīṃ |
mani basana bhūṣana bhūri vārahiṃ nāri maṅgala gāvahīm̐ ||
brahmādi surabara vipra beṣa banāi kautuka dekhahīṃ |
avaloki raghukula-kamala-rabi-chavi, suphala jīvana lekhahīṃ ||
नाऊ बारी भाट नट, राम निछावरि पाइ ।
मुदित असीसहिँ नाइ सिर, हरष न हृदयँ समाइ ॥
nāū bārī bhāṭa naṭa, rāma nichāvari pāi |
mudita asīsahim̐ nāi sira, haraṣa na hṛdayam̐ samāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0