बालकाण्ड

अध्याय 311: भरत शत्रुघ्न और स्त्रियों की प्रार्थना

6 श्लोक · 311 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

भरत शत्रुघ्न और स्त्रियों की प्रार्थना

स्त्रियाँ कहती हैं: अनेक प्रकार से पहुनाई होगी, ऐसी ससुराल किसे प्रिय न होगी? सखी, जैसी राम लक्ष्मण की जोड़ी है, वैसे ही राजा के साथ दो और बालक आए हैं, एक साँवला एक गोरा, सब अंगों से सुन्दर। भरत ऐसे राम जैसे हैं कि नर नारी सहसा पहचान नहीं पाते; लक्ष्मण और शत्रुघ्न एक रूप हैं, नख से शिख तक अनुपम। तुलसीदास कहते हैं कि कोई कवि इनकी उपमा नहीं दे सकता। नगर की स्त्रियाँ आँचल फैलाकर विधाता से माँगती हैं कि चारों भाइयों का विवाह इसी नगर में हो। सजल नेत्रों से वे कहती हैं: पुरारि सब करेंगे, दोनों राजा पुण्य के समुद्र हैं।

311.1

बिबिध भाँति होइहि पहुनाई । प्रिय न काहि अस सासुर माई ॥
तब तब राम लखनहि निहारी । होइहि सब पुर-लोग सुखारी ॥

bibidha bhām̐ti hoihi pahunāī | priya na kāhi asa sāsura māī ||
taba taba rāma lakhanahi nihārī | hoihi saba pura-loga sukhārī ||

311.2

सखि जस राम लखन कर जोटा । तैसेइ भूप सङ्ग दुइ ढोटा ॥
स्याम गौर सब अङ्ग सुहाये । ते सब कहहिं देखि जे आये ॥

sakhi jasa rāma lakhana kara joṭā | taisei bhūpa saṅga dui ḍhoṭā ||
syāma gaura saba aṅga suhāye | te saba kahahiṃ dekhi je āye ||

311.3

कहा एक में आजु निहारे । जनु बिरञ्चि निज हाथ सँवारे ॥
भरत रामही की अनुहारी । सहसा लखि न सकहिं नर नारी ॥

kahā eka meṃ āju nihāre | janu birañci nija hātha sam̐vāre ||
bharata rāmahī kī anuhārī | sahasā lakhi na sakahiṃ nara nārī ||

311.4

लखन सत्रुसूदनु एकरूपा । नख-सिख ते सब अङ्ग अनूपा ॥
मन भावहिं मुख बरनि न जाहीँ । उपमा कह त्रिभुवन कोउ नाहीं ॥

lakhana satrusūdanu ekarūpā | nakha-sikha te saba aṅga anūpā ||
mana bhāvahiṃ mukha barani na jāhīm̐ | upamā kaha tribhuvana kou nāhīṃ ||

311.छं॰ 1छन्द

उपमा न कोउ कह दास तुलसी कतहुँ कबि कोबिद कहैं ।
बल-बिनय-विद्या-सील,-सोभा सिन्धु इन्ह सम एइ अहैं ॥
पुर-नारि सकल पसारि अञ्चल, विधिहि बचन सुनावहीं ।
ब्याहिअहुँ चारिउ भाइ एहिं पुर, हम सुमङ्गल गावहीं ॥

upamā na kou kaha dāsa tulasī katahum̐ kabi kobida kahaiṃ |
bala-binaya-vidyā-sīla,-sobhā sindhu inha sama ei ahaiṃ ||
pura-nāri sakala pasāri añcala, vidhihi bacana sunāvahīṃ |
byāhiahum̐ cāriu bhāi ehiṃ pura, hama sumaṅgala gāvahīṃ ||

311.सो॰ 311सोरठा

कहहिँ परसपर नारि, बारि-बिलोचन पुलक-तन ।
सखि सब करब पुरारि, पुन्य पयोनिधि भूप दोउ ॥

kahahim̐ parasapara nāri, bāri-bilocana pulaka-tana |
sakhi saba karaba purāri, punya payonidhi bhūpa dou ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0