कौसिक सुनहु मन्द यह बालक । कुटिल काल बस निज कुल घालक ॥
भानु-बंस-राकेस कलङ्कू । निपट निरङ्कुस अबुध असंकू ॥
kausika sunahu manda yaha bālaka | kuṭila kāla basa nija kula ghālaka ||
bhānu-baṃsa-rākesa kalaṅkū | nipaṭa niraṅkusa abudha asaṃkū ||
5 श्लोक · 274 में से 361
परशुराम विश्वामित्र से कहते हैं: कौशिक, सुनो, यह बालक मन्दबुद्धि और कुटिल है, काल के वश होकर अपने ही कुल का नाश करने वाला है। सूर्यवंश रूपी चन्द्रमा का कलंक, पूरा निरंकुश, नासमझ और निडर है। यह क्षण भर में काल का ग्रास बनेगा। मैं पुकारकर कहे देता हूँ, फिर मुझे दोष मत देना; यदि इसे बचाना चाहते हो तो मेरा प्रताप, बल और क्रोध बताकर इसे रोको। लक्ष्मण कहते हैं कि आपके रहते आपका सुयश और कौन कह सकता है? आपने अपने मुँह से अपनी करनी अनेक बार अनेक प्रकार से कह दी है। फिर तीखी बात कहते हैं: शूरवीर रण में करनी करके दिखाते हैं, अपने मुँह से नहीं जताते; शत्रु को सामने पाकर बड़बड़ाते तो कायर हैं।
कौसिक सुनहु मन्द यह बालक । कुटिल काल बस निज कुल घालक ॥
भानु-बंस-राकेस कलङ्कू । निपट निरङ्कुस अबुध असंकू ॥
kausika sunahu manda yaha bālaka | kuṭila kāla basa nija kula ghālaka ||
bhānu-baṃsa-rākesa kalaṅkū | nipaṭa niraṅkusa abudha asaṃkū ||
काल-कवलु होइहि छन माहीं । कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं ॥
तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा । कहि प्रताप बल रोष हमारा ॥
kāla-kavalu hoihi chana māhīṃ | kahaum̐ pukāri khori mohi nāhīṃ ||
tumha haṭakau jauṃ cahahu ubārā | kahi pratāpa bala roṣa hamārā ||
लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा । तुम्हहिँ अछत को बरनइ पारा ॥
अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी । बार अनेक भाँति बहु बरनी ॥
lakhana kaheu muni sujasa tumhārā | tumhahim̐ achata ko baranai pārā ||
apane mum̐ha tumha āpani karanī | bāra aneka bhām̐ti bahu baranī ||
नहिँ संतोषु त पुनि कछु कहहू । जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू ॥
बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा । गारी देत न पावहु सोभा ॥
nahim̐ saṃtoṣu ta puni kachu kahahū | jani risa roki dusaha dukha sahahū ||
bīrabratī tumha dhīra achobhā | gārī deta na pāvahu sobhā ||
सूर समर करनी करहिँ, कहि न जनावहिँ आप ।
बिद्यमान रन पाइ रिपु, कायर करहिं प्रतापु ॥
sūra samara karanī karahim̐, kahi na janāvahim̐ āpa |
bidyamāna rana pāi ripu, kāyara karahiṃ pratāpu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0