लखन कहा हँसि हमरें जाना । सुनहु देव सब धनुष समाना ॥
का छति लाभ जून धनु तारे । देखा राम नयन के भोरें ॥
lakhana kahā ham̐si hamareṃ jānā | sunahu deva saba dhanuṣa samānā ||
kā chati lābha jūna dhanu tāre | dekhā rāma nayana ke bhoreṃ ||
5 श्लोक · 272 में से 361
लक्ष्मण हँसकर कहते हैं कि हमारी समझ में सब धनुष एक से हैं, पुराने धनुष के टूटने में क्या हानि क्या लाभ? श्रीराम ने उसे नया समझा था, वह छूते ही टूट गया, इसमें उनका कोई दोष नहीं; आप अकारण क्यों क्रोध करते हैं? परशुराम फरसे की ओर देखकर गरजते हैं: अरे मूर्ख, तूने मेरा स्वभाव नहीं सुना। बालक जानकर तुझे नहीं मारता, तू मुझे निरा मुनि समझता है। मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ, अत्यन्त क्रोधी, संसार में क्षत्रियकुल का शत्रु प्रसिद्ध हूँ। अपनी भुजाओं के बल से मैंने पृथ्वी को अनेक बार राजाओं से रहित करके ब्राह्मणों को दे दिया। सहस्रबाहु की भुजाएँ काटने वाला यह फरसा देख। राजकुमार, माता पिता को शोक में मत डाल; मेरा फरसा गर्भ के बालकों तक का नाश करता है।
लखन कहा हँसि हमरें जाना । सुनहु देव सब धनुष समाना ॥
का छति लाभ जून धनु तारे । देखा राम नयन के भोरें ॥
lakhana kahā ham̐si hamareṃ jānā | sunahu deva saba dhanuṣa samānā ||
kā chati lābha jūna dhanu tāre | dekhā rāma nayana ke bhoreṃ ||
छुअत टूट रघुपतिहु न दोषू । मुनि बिनु काज करिय कत रोसू ॥
बोले चितइ परस की ओरा । रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा ॥
chuata ṭūṭa raghupatihu na doṣū | muni binu kāja kariya kata rosū ||
bole citai parasa kī orā | re saṭha sunehi subhāu na morā ||
बालक बोलि बधउँ नहिँ तोही । केवल मुनि जड़ जानहि मोही ॥
बाल-ब्रह्मचारी अति कोही । बिस्व-विदित छत्रिय-कुल-द्रोही ॥
bālaka boli badhaum̐ nahim̐ tohī | kevala muni jar̤a jānahi mohī ||
bāla-brahmacārī ati kohī | bisva-vidita chatriya-kula-drohī ||
भुज-बल भूमि भूप बिनु कीन्ही । बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही ॥
सहसबाहु-भुज छेदनिहारा । परसु बिलाकु महीप-कुमारा ॥
bhuja-bala bhūmi bhūpa binu kīnhī | bipula bāra mahidevanha dīnhī ||
sahasabāhu-bhuja chedanihārā | parasu bilāku mahīpa-kumārā ||
मातु-पितहि जनि सोच बस, करसि महीप-किसोर ।
गर्भन्ह के अर्भक दलन, परसु मोर अति घोर ॥
mātu-pitahi jani soca basa, karasi mahīpa-kisora |
garbhanha ke arbhaka dalana, parasu mora ati ghora ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0