नाथ सम्भु-धनु भञ्जनिहारा । होइहि कोउ एक दास तुम्हारा ॥
आयसु काह कहिय किन मोही । सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही ॥
nātha sambhu-dhanu bhañjanihārā | hoihi kou eka dāsa tumhārā ||
āyasu kāha kahiya kina mohī | suni risāi bole muni kohī ||
5 श्लोक · 271 में से 361
श्रीराम परशुराम से विनय से कहते हैं कि शम्भु का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा, आज्ञा दीजिए। क्रोधी मुनि उत्तर देते हैं कि सेवक वह है जो सेवा करे, जो शत्रु का काम करे उससे तो युद्ध ही होता है। जिसने शिवधनुष तोड़ा वह सहस्रबाहु के समान मेरा बैरी है, वह सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे। यह सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराते हैं और चुटकी लेते हैं कि बचपन में हमने बहुत सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया, इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? परशुराम भड़क उठते हैं: अरे राजकुमार, तू काल के वश है, बोलने का होश नहीं; क्या त्रिपुरारि का जगत्प्रसिद्ध धनुष कोई धनुही है?
नाथ सम्भु-धनु भञ्जनिहारा । होइहि कोउ एक दास तुम्हारा ॥
आयसु काह कहिय किन मोही । सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही ॥
nātha sambhu-dhanu bhañjanihārā | hoihi kou eka dāsa tumhārā ||
āyasu kāha kahiya kina mohī | suni risāi bole muni kohī ||
सेवक सो जो करै सेवकाई । अरि करनी करि करिय लराई ॥
सुनहु राम जेहिं सिव-धनु तोरा । सहसबाहु सम से रिपु मोरा ॥
sevaka so jo karai sevakāī | ari karanī kari kariya larāī ||
sunahu rāma jehiṃ siva-dhanu torā | sahasabāhu sama se ripu morā ||
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा । न त मारे जैहहिं सब राजा ॥
सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने । बोले परसुधरहि अपमाने ॥
so bilagāu bihāi samājā | na ta māre jaihahiṃ saba rājā ||
suni muni bacana lakhana musukāne | bole parasudharahi apamāne ||
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं । कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं ॥
एहि धनु पर ममता केहि हेतू । सुनि रिसाइ कह भृगुकुल केतू ॥
bahu dhanuhīṃ torīṃ larikāīṃ | kabahum̐ na asi risa kīnhi gosāīṃ ||
ehi dhanu para mamatā kehi hetū | suni risāi kaha bhṛgukula ketū ||
रे नृप-बालक काल-बस, बोलत तोहि न सँमार ।
धनुहीं सम तिपुरारि-धनु, विदित सकल संसार ॥
re nṛpa-bālaka kāla-basa, bolata tohi na sam̐māra |
dhanuhīṃ sama tipurāri-dhanu, vidita sakala saṃsāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0