बालकाण्ड

अध्याय 27: कलियुग में नाम ही एक आधार

5 श्लोक · 27 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कलियुग में नाम ही एक आधार

हर युग, हर काल और हर लोक में जीव नाम जपकर शोकरहित हुए हैं। वेद, पुराण और सन्त कहते हैं कि सब पुण्यों का फल राम में प्रेम है। पहले युग में ध्यान, दूसरे में यज्ञ और द्वापर में पूजन साधन थे। कलियुग मल की जड़ है, और मन पाप के समुद्र की मछली हैं। यहाँ नाम कल्पवृक्ष है जो संसार के सब जाल काट देता है, इस लोक और परलोक का माता पिता है। कलि में न कर्म है, न भक्ति, न विवेक, राम नाम ही एक सहारा है। कलि कपटी कालनेमि है और नाम हनुमान। दोहा कहता है कि नाम नृसिंह है, कलिकाल हिरण्यकशिपु, और जप करने वाले प्रह्लाद, जिनकी रक्षा नाम करेगा।

27.1

चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका । भये नाम जपि जीव विसोका ॥
बेद-पुरान-सन्त मत एहू । सकल सुकृत फल राम सनेहू ॥

cahum̐ juga tīni kāla tihum̐ lokā | bhaye nāma japi jīva visokā ||
beda-purāna-santa mata ehū | sakala sukṛta phala rāma sanehū ||

27.2

ध्यान प्रथम जुग मख विधि दूजें । द्वापर परितोषत प्रभु पूजें ॥
कलि केवल मल मूल मलीना । पाप पयोनिधि जन मन मीना ॥

dhyāna prathama juga makha vidhi dūjeṃ | dvāpara paritoṣata prabhu pūjeṃ ||
kali kevala mala mūla malīnā | pāpa payonidhi jana mana mīnā ||

27.3

नाम कामतरु काल कराला । सुमिरत समन सकल जग जाला ॥
राम नाम कलि अभिमत दाता । हित परलोक लोक पितु माता ॥

nāma kāmataru kāla karālā | sumirata samana sakala jaga jālā ||
rāma nāma kali abhimata dātā | hita paraloka loka pitu mātā ||

27.4

नहिं कलि करम न भगति बिबेकू । राम नाम अवलम्बन एकू ॥
कालनेमि कलि कपट निधानू । नाम सुमति समरथ हनुमानू ॥

nahiṃ kali karama na bhagati bibekū | rāma nāma avalambana ekū ||
kālanemi kali kapaṭa nidhānū | nāma sumati samaratha hanumānū ||

दो॰ 27दोहा

राम नाम नरकेसरी, कनककसिपु कलिकाल ।
जापक जन प्रहलाद जिमि, पालिहि दलि सुर साल ॥

rāma nāma narakesarī, kanakakasipu kalikāla |
jāpaka jana prahalāda jimi, pālihi dali sura sāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0