बालकाण्ड

अध्याय 268: परशुराम का रंगभूमि में आगमन

5 श्लोक · 268 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

परशुराम का रंगभूमि में आगमन

हलचल देखकर नगर की स्त्रियाँ व्याकुल होकर राजाओं को कोसने लगीं। उसी समय शिव-धनुष टूटने का समाचार सुनकर भृगुकुल रूपी कमल के सूर्य परशुराम आ पहुँचे। राजा ऐसे सकुचा गए जैसे बाज के झपटने पर लवा छिप जाते हैं। गोरे शरीर पर भस्म और चौड़े माथे पर त्रिपुंड है। सिर पर जटाएँ हैं और चंद्रमा जैसा मुख क्रोध से कुछ लाल है। भौंहें टेढ़ी और नेत्र लाल हैं, सहज देखना भी क्रोध भरा लगता है। बैल जैसे कंधे और लंबी भुजाएँ हैं, जनेऊ और मृगछाला है, कमर में दो तरकश, हाथ में धनुष-बाण और कंधे पर फरसा है। वेष शांत पर करनी कठोर, मानो वीर रस मुनि का शरीर धरकर आया हो।

268.1

खरभरु देखि विकल पुर-नारीं । सब मिलि देहिँ महीपन्ह गारीं ॥
तेहिं अवसर सुनि सिव-धनु-भङ्गा । आयउ भृगुकुल कमल-पतङ्गा ॥

kharabharu dekhi vikala pura-nārīṃ | saba mili dehim̐ mahīpanha gārīṃ ||
tehiṃ avasara suni siva-dhanu-bhaṅgā | āyau bhṛgukula kamala-pataṅgā ||

268.2

देखि महीप सकल सकुचाने । बाज झपट जनु लवा लुकाने ॥
गौर शरीर भूति मलि भ्राजा । भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा ॥

dekhi mahīpa sakala sakucāne | bāja jhapaṭa janu lavā lukāne ||
gaura śarīra bhūti mali bhrājā | bhāla bisāla tripuṃḍa birājā ||

268.3

सीस जटा ससिबदनु सुहावा । रिस-बस कछुक अरुन होइ आवा ॥
भृकुटी-कुटिल नयन रिस राते । सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते ॥

sīsa jaṭā sasibadanu suhāvā | risa-basa kachuka aruna hoi āvā ||
bhṛkuṭī-kuṭila nayana risa rāte | sahajahum̐ citavata manahum̐ risāte ||

268.4

वृषभ कन्ध उर-बाहु बिलासा । चारु जनेउ माल मृगछाला ॥
कटि मुनि-बसन तून दुइ बाँधें । धनु-सर-कर कुठार-कल-काँधें ॥

vṛṣabha kandha ura-bāhu bilāsā | cāru janeu māla mṛgachālā ||
kaṭi muni-basana tūna dui bām̐dheṃ | dhanu-sara-kara kuṭhāra-kala-kām̐dheṃ ||

दो॰ 268दोहा

सान्त बेष करनी कठिन, बरनि न जाइ सरूप ।
धरि मुनि तनु जनु बीर रसु, आयउ जहँ सब भूप ॥

sānta beṣa karanī kaṭhina, barani na jāi sarūpa |
dhari muni tanu janu bīra rasu, āyau jaham̐ saba bhūpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0