बालकाण्ड

अध्याय 263: मिथिला में आनंद, सीता श्रीराम की ओर

5 श्लोक · 263 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मिथिला में आनंद, सीता श्रीराम की ओर

झाँझ, मृदंग, शंख, शहनाई, भेरी, ढोल और सुहावनी दुंदुभी बजने लगीं, और जहाँ तहाँ युवतियाँ मंगल गीत गाने लगीं। सखियों सहित सब रानियाँ ऐसी हर्षित हुईं मानो सूखते धान पर पानी पड़ गया हो। जनक ने चिंता छोड़कर सुख पाया, जैसे तैरते तैरते थका आदमी थाह पा जाए। धनुष टूटने से राजा ऐसे श्रीहीन हो गए जैसे दिन में दीपक की शोभा जाती रहती है। सीता के सुख का वर्णन कैसे करें, मानो चातकी ने स्वाति का जल पा लिया हो। लक्ष्मण श्रीराम को ऐसे देख रहे हैं जैसे चकोर का बच्चा चंद्रमा को। तब शतानंद ने आज्ञा दी और सीता श्रीराम के पास चलीं। साथ में सुंदर और चतुर सखियाँ मंगलाचार गाती चलीं। सीता बाल हंस जैसी चाल से चलीं, उनके अंगों में अपार शोभा है।

263.1

झाँझि मृदङ्ग सङ्ख सहनाई । भेरि ढोल दुन्दुभी सुहाई ॥
बाजहिँ बहु बाजने सुहाये । जहँ तहँ जुबतिन्ह मङ्गल गाये ॥

jhām̐jhi mṛdaṅga saṅkha sahanāī | bheri ḍhola dundubhī suhāī ||
bājahim̐ bahu bājane suhāye | jaham̐ taham̐ jubatinha maṅgala gāye ||

263.2

सखिन्ह सहित हरषीँ सब रानी । सूखत धान परा जनु पानी ॥
जनक लहेउ सुख सोच बिहाई । पैरत थकें थाह जनु पाई ॥

sakhinha sahita haraṣīm̐ saba rānī | sūkhata dhāna parā janu pānī ||
janaka laheu sukha soca bihāī | pairata thakeṃ thāha janu pāī ||

263.3

श्रीहत भये भूप धनु टूटे । जैसें दिवस दीप छबि छूटे ॥
सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती । जनु चातकी पाइ जल स्वाती ॥

śrīhata bhaye bhūpa dhanu ṭūṭe | jaiseṃ divasa dīpa chabi chūṭe ||
sīya sukhahi barania kehi bhām̐tī | janu cātakī pāi jala svātī ||

263.4

रामहिँ लखन बिलोकत कैसें । ससिहि चकोर किसोरकु जैसें ॥
सतानन्द तब आयसु दीन्ही । सीतां गवन राम पहिँ कीन्हा ॥

rāmahim̐ lakhana bilokata kaiseṃ | sasihi cakora kisoraku jaiseṃ ||
satānanda taba āyasu dīnhī | sītāṃ gavana rāma pahim̐ kīnhā ||

दो॰ 263दोहा

सङ्ग सखीं सुन्दर चतुर, गावहिँ मङ्गलचार ।
गवनी बाल-मराल-गति, सुखमा अङ्ग अपार ॥

saṅga sakhīṃ sundara catura, gāvahim̐ maṅgalacāra |
gavanī bāla-marāla-gati, sukhamā aṅga apāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0