बालकाण्ड

अध्याय 257: सीता महेश, भवानी और गणेश से विनती करती हैं

5 श्लोक · 257 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सीता महेश, भवानी और गणेश से विनती करती हैं

सखी अपनी बात पूरी करती है, कामदेव ने फूलों का धनुष-बाण लेकर ही सारे लोकों को वश में कर रखा है। हे देवी, संशय छोड़ दीजिए, श्रीराम धनुष तोड़ेंगे। यह सुनकर रानी को विश्वास हुआ, विषाद मिटा और प्रीति बढ़ी। तब श्रीराम को देखकर वैदेही डरे हुए हृदय से हर देवता से विनती करने लगीं। वे मन ही मन मनाती हैं, हे महेश और भवानी, प्रसन्न होइए, अपनी सेवा का फल दीजिए और धनुष का भारीपन हर लीजिए। हे गणनायक, वर देने वाले देव, आज तक मैंने आपकी सेवा की है, धनुष का बोझ बहुत हल्का कर दीजिए। रघुवीर की छवि बार बार देखती हुई वे धीरज धरकर देवताओं को मनाती रहीं, नेत्रों में प्रेम के आँसू थे और शरीर पुलकित था।

257.1

काम कुसुम-धनु-सायक लीन्हे । सकल भुवन अपने बस कीन्हे ॥
देबि तजिअ संसय अस जानी । भञ्जब धनुष राम सुनु रानी ॥

kāma kusuma-dhanu-sāyaka līnhe | sakala bhuvana apane basa kīnhe ||
debi tajia saṃsaya asa jānī | bhañjaba dhanuṣa rāma sunu rānī ||

257.2

सखी बचन सुनि भइ परतीती । मिटा बिषाद बढ़ी अति प्रीती ॥
तब रामहिँ बिलोकि बैदेही । सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही ॥

sakhī bacana suni bhai paratītī | miṭā biṣāda bar̤hī ati prītī ||
taba rāmahim̐ biloki baidehī | sabhaya hṛdayam̐ binavati jehi tehī ||

257.3

मनहीं मन मनाव अकुलानी । होहु प्रसन्न महेस भवानी ॥
करहु सुफल आपनि सेवकाई । करि हित हरहु चाप गरुआई ॥

manahīṃ mana manāva akulānī | hohu prasanna mahesa bhavānī ||
karahu suphala āpani sevakāī | kari hita harahu cāpa garuāī ||

257.4

गन-नायक बर-दायक देवा । आजु लगें कीन्हिउँ तव सेवा ॥
बार बार बिनती सुनि मोरी । करहु चाप-गुरुता अति थोरी ॥

gana-nāyaka bara-dāyaka devā | āju lageṃ kīnhium̐ tava sevā ||
bāra bāra binatī suni morī | karahu cāpa-gurutā ati thorī ||

दो॰ 257दोहा

देखि देखि रघुबीर छबि, सुर मनाव धरि धीर ।
भरे बिलोचन प्रेम-जल, पुलकावली-सरीर ॥

dekhi dekhi raghubīra chabi, sura manāva dhari dhīra |
bhare bilocana prema-jala, pulakāvalī-sarīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0