बालकाण्ड

अध्याय 243: दोनों भाइयों के मुख की शोभा

5 श्लोक · 243 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दोनों भाइयों के मुख की शोभा

तुलसीदास जी दोनों सहज मनोहर मूर्तियों का वर्णन करते हैं, जिनके आगे करोड़ों कामदेव की उपमा भी छोटी है। उनके मुख शरद के चंद्रमा को लजाते हैं और कमल जैसे नेत्र मन को भाते हैं। उनकी चितवन कामदेव का मद भी हर लेती है। सुंदर गाल, कानों में हिलते कुंडल, सुंदर ठोड़ी और होंठ, और कोमल वाणी है। हँसी चंद्रमा की किरणों को लजाती है, भौंहें टेढ़ी और नाक मनोहर है। चौड़े माथे पर तिलक झलकता है और बालों को देखकर भौंरों की पंक्तियाँ लजाती हैं। सिरों पर पीली चौतनी है, जिनमें बीच बीच में फूलों की कलियाँ हैं। शंख जैसी रेखाओं वाली गरदन मानो तीनों लोकों की सुंदरता की सीमा है। बैल जैसे कंधे, सिंह जैसी चाल, और वे बल के भंडार हैं।

243.1

सहज मनोहर मूरति दोऊ । कोटि-काम उपमा लघु सोऊ ॥
सरद-चन्द-निन्दक मुख नीके । नीरज-नयन भावते जी के ॥

sahaja manohara mūrati doū | koṭi-kāma upamā laghu soū ||
sarada-canda-nindaka mukha nīke | nīraja-nayana bhāvate jī ke ||

243.2

चितवनि चारु मार-मद-हरनी । भावति हृदय जाति नहिँ बरनी ॥
कल-कपोल-स्त्रुति-कुंडल-लोला । चिबुक अधर सुन्दर मृदु बोला ॥

citavani cāru māra-mada-haranī | bhāvati hṛdaya jāti nahim̐ baranī ||
kala-kapola-struti-kuṃḍala-lolā | cibuka adhara sundara mṛdu bolā ||

243.3

कुमुदबन्धु-कर-निन्दक हासा । भृकुटी बिकट मनोहर नासा ॥
भाल बिसाल तिलक झलकाहीँ । कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीँ ॥

kumudabandhu-kara-nindaka hāsā | bhṛkuṭī bikaṭa manohara nāsā ||
bhāla bisāla tilaka jhalakāhīm̐ | kaca biloki ali avali lajāhīm̐ ||

243.4

पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई । कुसुम-कलीं बिच बीच बनाईं ॥
रेखा रुचिर कम्बु कल गीवाँ । जनु त्रिभुवन सुखमा की सीवाँ ॥

pīta cautanīṃ siranhi suhāī | kusuma-kalīṃ bica bīca banāīṃ ||
rekhā rucira kambu kala gīvām̐ | janu tribhuvana sukhamā kī sīvām̐ ||

दो॰ 243दोहा

कुञ्जर मनि कंठा कलित, उरन्हि तुलसिका माल ।
वृषभ-कन्ध केहरि-ठवनि, बल-निधि बाहु बिसाल ॥

kuñjara mani kaṃṭhā kalita, uranhi tulasikā māla |
vṛṣabha-kandha kehari-ṭhavani, bala-nidhi bāhu bisāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0