बालकाण्ड

अध्याय 241: जिसकी जैसी भावना, उसे वैसी प्रभु-मूर्ति

5 श्लोक · 241 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

जिसकी जैसी भावना, उसे वैसी प्रभु-मूर्ति

उसी समय दोनों राजकुमार आए, मानो मनोहरता ही उनके शरीर पर छा गई हो। गुणों के सागर, चतुर, श्रेष्ठ वीर, साँवले और गोरे, वे राजसमाज में ऐसे शोभित हैं मानो तारों के बीच दो पूर्ण चंद्रमा हों। यहाँ तुलसीदास जी कहते हैं कि जिसकी जैसी भावना थी, उसने प्रभु की मूर्ति वैसी ही देखी। रणधीर राजाओं को लगा मानो वीर रस ने शरीर धारण किया हो। कुटिल राजा डर गए, मानो कोई भयानक मूर्ति देखी हो। राजाओं का वेश धरे असुरों ने उन्हें साक्षात काल देखा। नगरवासियों ने उन्हें मनुष्यों के भूषण और नेत्रों का सुख देखा। स्त्रियाँ अपनी रुचि के अनुसार हर्ष से देखने लगीं, मानो शृंगार रस ने अनुपम मूर्ति धारण की हो।

241.1

राजकुअँर तेहि अवसर आये । मनहुँ मनोहरता तन छाये ॥
गुन-सागर नागर बर बीरा । सुन्दर स्यामल गौर सरीरा ॥

rājakuam̐ra tehi avasara āye | manahum̐ manoharatā tana chāye ||
guna-sāgara nāgara bara bīrā | sundara syāmala gaura sarīrā ||

241.2

राज-समाज विराजत रुरे । उडुगन महँ जनु जुग बिधु पूरे ॥
जिन्ह कै रही भावना जैसी । प्रभु मूरति तिन्ह देखी तिन्ह तैसी ॥

rāja-samāja virājata rure | uḍugana maham̐ janu juga bidhu pūre ||
jinha kai rahī bhāvanā jaisī | prabhu mūrati tinha dekhī tinha taisī ||

241.3

देखहिँ भूप महा-रन-धीरा । मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा ॥
डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी । मनहुँ भयानक मूरति भारी ॥

dekhahim̐ bhūpa mahā-rana-dhīrā | manahum̐ bīra rasu dhareṃ sarīrā ||
ḍare kuṭila nṛpa prabhuhi nihārī | manahum̐ bhayānaka mūrati bhārī ||

241.4

रहे असुर छल छोनिप बेखा । तिन्ह प्रभु प्रगट काल सम देखा ॥
पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई । नर-भूषन लोचन सुखदाई ॥

rahe asura chala chonipa bekhā | tinha prabhu pragaṭa kāla sama dekhā ||
purabāsinha dekhe dou bhāī | nara-bhūṣana locana sukhadāī ||

दो॰ 241दोहा

नारि बिलोकहिँ हरषि हियँ, निज निज रुचि अनुरूप ।
जनु सोहत सिङ्गार धरि, मूरति परम अनूप ॥

nāri bilokahim̐ haraṣi hiyam̐, nija nija ruci anurūpa |
janu sohata siṅgāra dhari, mūrati parama anūpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0