बालकाण्ड

अध्याय 238: अरुणोदय और लक्ष्मण के शुभ वचन

5 श्लोक · 238 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

अरुणोदय और लक्ष्मण के शुभ वचन

श्रीराम चंद्रमा के दोष गिनाते रहे। वह घटता बढ़ता है, विरहिणी को दुख देता है, राहु उसे ग्रस लेता है, वह चकवे को शोक देता है और कमल का शत्रु है। सीता के मुख की उपमा उससे देना अनुचित होगा। इस प्रकार चंद्रमा के बहाने सीता के मुख का बखान करके प्रभु गुरु के पास गए, प्रणाम किया और विश्राम किया। रात बीतने पर वे जागे और भाई से बोले, तात, देखो, अरुणोदय हुआ है, जो कमल, चकवे और सारे लोक को सुख देता है। लक्ष्मण हाथ जोड़कर प्रभु का प्रभाव बताने वाली कोमल वाणी बोले, जैसे अरुणोदय से कुमुद सकुचा गए और तारे मलिन हो गए, वैसे ही आपका आगमन सुनकर राजा बलहीन हो गए हैं।

238.1

घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई । ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई ॥
कोक सोक-प्रद पङ्कज-द्रोही । अवगुन बहुत चन्द्रमा तोही ॥

ghaṭai bar̤hai birahani dukhadāī | grasai rāhu nija saṃdhihiṃ pāī ||
koka soka-prada paṅkaja-drohī | avaguna bahuta candramā tohī ||

238.2

बैदेही-मुख पटतर दीन्हे । होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे ॥
सिय-मुख-छबि बिधु ब्याज बखानी । गुरु पहिँ चले निसा बड़ि जानी ॥

baidehī-mukha paṭatara dīnhe | hoi doṣa bar̤a anucita kīnhe ||
siya-mukha-chabi bidhu byāja bakhānī | guru pahim̐ cale nisā bar̤i jānī ||

238.3

करि मुनि-चरन-सरोज प्रनामा । आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा ॥
बिगत निसा रघुनायक जागे । बन्धु बिलोकि कहन अस लागे ॥

kari muni-carana-saroja pranāmā | āyasu pāi kīnha biśrāmā ||
bigata nisā raghunāyaka jāge | bandhu biloki kahana asa lāge ||

238.4

उदउ अरुन अवलोकहु ताता । पङ्कज-कोक-लोक सुखदाता ॥
बोले लखन जोरि जुग पानी । प्रभु-प्रभाव-सूचक मृदु बानी ॥

udau aruna avalokahu tātā | paṅkaja-koka-loka sukhadātā ||
bole lakhana jori juga pānī | prabhu-prabhāva-sūcaka mṛdu bānī ||

दो॰ 238दोहा

अरुनोदयँ सकुचे कुमुद, उडुगन जोति मलीन ।
तिमि तुम्हार आगमन सुनि, भये नृपति बल हीन ॥

arunodayam̐ sakuce kumuda, uḍugana joti malīna |
timi tumhāra āgamana suni, bhaye nṛpati bala hīna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0