बालकाण्ड

अध्याय 239: जनक शतानंद को भाइयों को बुलाने भेजते हैं

6 श्लोक · 239 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

जनक शतानंद को भाइयों को बुलाने भेजते हैं

लक्ष्मण आगे कहते हैं, राजा तारों जैसे हैं, थोड़ा उजाला करते हैं, पर धनुष रूपी भारी अंधकार नहीं मिटा सकते। जैसे रात बीतने पर कमल, भौंरे और पक्षी हर्षित होते हैं, वैसे ही धनुष टूटने पर आपके सब भक्त सुखी होंगे। अपने उदय के बहाने सूर्य ने राजाओं को आपका प्रताप और भुजाओं का बल दिखा दिया है। भाई के वचन सुनकर प्रभु मुस्कुराए, स्नान और नित्यकर्म करके गुरु के चरणों में सिर नवाया। तब जनक ने शतानंद को विश्वामित्र के पास भेजा। उन्होंने जनक की विनती सुनाई और मुनि ने हर्षित होकर दोनों भाइयों को बुलाया। शतानंद को प्रणाम करके प्रभु गुरु के पास बैठे, तब मुनि बोले, तात, चलो, जनक ने बुलाया है।

239.1

नृप सब नखत करहिँ उजिआरी । टारि न सकहिँ चाप तम भारी ॥
कमल-कोक-मधुकर-खग नाना । हरषे सकल निसा अवसाना ॥

nṛpa saba nakhata karahim̐ ujiārī | ṭāri na sakahim̐ cāpa tama bhārī ||
kamala-koka-madhukara-khaga nānā | haraṣe sakala nisā avasānā ||

239.2

ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे । होइहहिँ टूटें धनुष सुखारे ॥
उयउ भानु बिनु स्त्रम तम नासा । दुरे नखत जग तेज प्रकासा ॥

aisehiṃ prabhu saba bhagata tumhāre | hoihahim̐ ṭūṭeṃ dhanuṣa sukhāre ||
uyau bhānu binu strama tama nāsā | dure nakhata jaga teja prakāsā ||

239.3

रबि निज उदय ब्याज रघुराया । प्रभु प्रताप सब नृपन्ह दिखाया ॥
तव-भुज-बल-महिमा उदघाटी । प्रगटी धनु विघटन परिपाटी ॥

rabi nija udaya byāja raghurāyā | prabhu pratāpa saba nṛpanha dikhāyā ||
tava-bhuja-bala-mahimā udaghāṭī | pragaṭī dhanu vighaṭana paripāṭī ||

239.4

बन्धु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने । होइ सुचि सहज पुनीत नहाने ॥
नित्यक्रिया करि गुरु पहिँ आये । चरन-सरोज सुभग सिर नाये ॥

bandhu bacana suni prabhu musukāne | hoi suci sahaja punīta nahāne ||
nityakriyā kari guru pahim̐ āye | carana-saroja subhaga sira nāye ||

239.5

सतानन्द तब जनक बोलाये । कौसिक मुनि पहिँ तुरत पठाये ॥
जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई । हरषे बोलि लिये दोउ भाई ॥

satānanda taba janaka bolāye | kausika muni pahim̐ turata paṭhāye ||
janaka binaya tinha āi sunāī | haraṣe boli liye dou bhāī ||

दो॰ 239दोहा

सतानन्द पद बन्दि प्रभु, बैठे गुरु पहिँ जाइ ।
चलहु तात मुनि कहेउ तब, पठवा जनक बोलाइ ॥

satānanda pada bandi prabhu, baiṭhe guru pahim̐ jāi |
calahu tāta muni kaheu taba, paṭhavā janaka bolāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0