बालकाण्ड

अध्याय 233: दोनों वीर किशोरों की शोभा

5 श्लोक · 233 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दोनों वीर किशोरों की शोभा

तुलसीदास जी शोभा की सीमा दोनों वीरों का चित्र खींचते हैं, जिनके शरीर नीले और पीले कमल जैसे हैं। सिर पर मोरपंख हैं, जिनके बीच फूलों की कलियाँ लगी हैं। माथे पर तिलक और पसीने की बूँदें हैं, कानों में सुंदर आभूषण हैं। टेढ़ी भौंहें, घुँघराले बाल और नए कमल जैसे रतनारे नेत्र हैं, और हँसी मन मोल ले लेती है। कवि कहते हैं कि उस मुख की छवि मुझसे नहीं कही जाती, जिसे देखकर अनेक कामदेव लजा जाएँ। छाती पर मणियों की माला है, शंख जैसी गरदन है, और साँवले कुँवर के बाएँ हाथ में फूलों का दोना है। उन्हें देखकर सखियाँ अपनी सुध भूल गईं।

233.1

सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा । नील-पीत-जलजाभ सरीरा ॥
मोर-पंख सिर सोहत नीके । गुच्छ बीच बिच कुसुम-कली के ॥

sobhā sīvam̐ subhaga dou bīrā | nīla-pīta-jalajābha sarīrā ||
mora-paṃkha sira sohata nīke | guccha bīca bica kusuma-kalī ke ||

233.2

भाल तिलक श्रमबिंदु सुहाये । स्त्रवन सुभग भूषन छबि छाये ॥
बिकट भृकुटि कच घूघरवारे । नव-सरोज लोचन रतनारे ॥

bhāla tilaka śramabiṃdu suhāye | stravana subhaga bhūṣana chabi chāye ||
bikaṭa bhṛkuṭi kaca ghūgharavāre | nava-saroja locana ratanāre ||

233.3

चारु चिबुक नासिका कपोला । हास बिलास लेत मन मोला ॥
मुख-छबि कहि न जाइ मोहि पाहीँ । जो बिलोकि बहु काम लजाहीँ ॥

cāru cibuka nāsikā kapolā | hāsa bilāsa leta mana molā ||
mukha-chabi kahi na jāi mohi pāhīm̐ | jo biloki bahu kāma lajāhīm̐ ||

233.4

उर-मनि-माल कम्बु कल गीवा । काम-कलभ-कर भुज बल सीवाँ ॥
सुमन समेत बाम कर दोना । सावँर कुअँर सखी सुठि लोना ॥

ura-mani-māla kambu kala gīvā | kāma-kalabha-kara bhuja bala sīvām̐ ||
sumana sameta bāma kara donā | sāvam̐ra kuam̐ra sakhī suṭhi lonā ||

दो॰ 233दोहा

केहरि कटि पट पीत धर, सुषमा सील निधान ।
देखि भानुकुलभूषनहिँ, बिसरा सखिन्ह अपान ॥

kehari kaṭi paṭa pīta dhara, suṣamā sīla nidhāna |
dekhi bhānukulabhūṣanahim̐, bisarā sakhinha apāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0