बालकाण्ड

अध्याय 232: लताओं की ओट से सीता श्रीराम को देखती हैं

5 श्लोक · 232 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

लताओं की ओट से सीता श्रीराम को देखती हैं

सीता चकित होकर चारों ओर देखती हैं और सोचती हैं कि राजकुमार कहाँ चले गए। उनकी हिरनी जैसी आँखें जहाँ पड़तीं, मानो श्वेत कमलों की पंक्ति बरस जाती। तब सखियों ने लता की ओट से दोनों किशोर दिखाए। रूप देखकर नेत्र ऐसे हर्षित हुए मानो अपना धन पहचान लिया हो। श्रीराम की छवि निहारते पलकें झपकना भूल गईं और शरीर सुध खो बैठा, जैसे शरद के चंद्रमा को चकोरी देख रही हो। नेत्रों के मार्ग से श्रीराम को हृदय में लाकर सयानी सीता ने पलकों के किवाड़ बंद कर लिए। सखियाँ उन्हें प्रेमवश जानकर कुछ न बोलीं। तभी दोनों भाई लता-मंडप से ऐसे निकले मानो बादल हटाकर दो निर्मल चंद्रमा निकले हों।

232.1

चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता । कहँ गये नृप-किसोर मन चिन्ता ॥
जहँ बिलोक मृग-सावक-नैनी । जनु तहँ बरिस कमल-सित-स्रेनी ॥

citavahi cakita cahūm̐ disi sītā | kaham̐ gaye nṛpa-kisora mana cintā ||
jaham̐ biloka mṛga-sāvaka-nainī | janu taham̐ barisa kamala-sita-srenī ||

232.2

लता ओट तब सखिन्ह लखाये । स्यामल गौर किसोर सुहाये ॥
देखि रूप लोचन ललचाने । हरषे जनु निज निधि पहिचाने ॥

latā oṭa taba sakhinha lakhāye | syāmala gaura kisora suhāye ||
dekhi rūpa locana lalacāne | haraṣe janu nija nidhi pahicāne ||

232.3

थके नयन रघुपति छबि देखें । पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेखे ॥
अधिक सनेहँ देह भइ भोरी । सरद-ससिहि जनु चितव चकोरी ॥

thake nayana raghupati chabi dekheṃ | palakanhihūm̐ pariharīṃ nimekhe ||
adhika saneham̐ deha bhai bhorī | sarada-sasihi janu citava cakorī ||

232.4

लोचन मग रामहिँ उर आनी । दीन्हे पलक कपाट सयानी ॥
जब सिय सखिन्ह प्रेम-बस जानी । कहि न सकहिँ कछु मन सकुचानी ॥

locana maga rāmahim̐ ura ānī | dīnhe palaka kapāṭa sayānī ||
jaba siya sakhinha prema-basa jānī | kahi na sakahim̐ kachu mana sakucānī ||

दो॰ 232दोहा

लता-भवन से प्रगट भे, तेहि अवसर दोउ भाइ ।
निकसे जनु जुग बिमल बिधु, जलद-पटल बिलगाइ ॥

latā-bhavana se pragaṭa bhe, tehi avasara dou bhāi |
nikase janu juga bimala bidhu, jalada-paṭala bilagāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0