बालकाण्ड

अध्याय 230: श्रीराम सीता को पहली बार देखते हैं

5 श्लोक · 230 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम सीता को पहली बार देखते हैं

कंगन, करधनी और पायल की ध्वनि सुनकर श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं, मानो कामदेव ने विश्व-विजय के लिए नगाड़ा बजा दिया हो। उन्होंने उस ओर देखा और सीता के मुखचंद्र के लिए उनके नेत्र चकोर बन गए। नेत्र ऐसे स्थिर हुए मानो पलकों में बसने वाले राजा निमि सकुचाकर हट गए हों। प्रभु हृदय में सराहते रहे, पर मुँह से वचन न निकले। मानो ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता इन्हीं में दिखा दी हो। वे सुंदरता को भी सुंदर करती हैं, जैसे छवि के घर में दीपशिखा जल रही हो। कवि कहते हैं कि सब उपमाएँ जूठी हो चुकी हैं। फिर अपनी दशा विचारकर प्रभु पवित्र मन से छोटे भाई से बोले।

230.1

कङ्कन किङ्किनि नूपुर धुनि सुनि । कहत लखन सन राम हृदयँ गुनि ॥
मानहुँ मदन दुन्दुभी दीन्ही । मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही ॥

kaṅkana kiṅkini nūpura dhuni suni | kahata lakhana sana rāma hṛdayam̐ guni ||
mānahum̐ madana dundubhī dīnhī | manasā bisva bijaya kaham̐ kīnhī ||

230.2

अस कहि फिरि चितये तेहि ओरा । सिय मुख ससि भये नयन चकोरा ॥
भये बिलोचन चारु अचञ्चल । मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल ॥

asa kahi phiri citaye tehi orā | siya mukha sasi bhaye nayana cakorā ||
bhaye bilocana cāru acañcala | manahum̐ sakuci nimi taje digaṃcala ||

230.3

देखि सीय सोभा सुख पावा । हृदयँ सराहत बचन न आवा ॥
जनु बिरज्चि सब निज निपुनाई । बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई ॥

dekhi sīya sobhā sukha pāvā | hṛdayam̐ sarāhata bacana na āvā ||
janu birajci saba nija nipunāī | biraci bisva kaham̐ pragaṭi dekhāī ||

230.4

सुन्दरता कहँ सुन्दर करई । छबि-गृह दीप-सिखा जनु बरई ॥
सब उपमा कबि रहे जुठारी । केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी ॥

sundaratā kaham̐ sundara karaī | chabi-gṛha dīpa-sikhā janu baraī ||
saba upamā kabi rahe juṭhārī | kehiṃ paṭatarauṃ bidehakumārī ||

दो॰ 230दोहा

सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु, आपनि दसा बिचारि ।
बोले सुचि-मन अनुज सन, बचन समय अनुहारि ॥

siya sobhā hiyam̐ barani prabhu, āpani dasā bicāri |
bole suci-mana anuja sana, bacana samaya anuhāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0