बालकाण्ड

अध्याय 229: सखी दोनों राजकुमारों का वर्णन करती है

5 श्लोक · 229 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सखी दोनों राजकुमारों का वर्णन करती है

सखी ने कहा कि बाग देखने दो किशोर राजकुमार आए हैं, एक साँवले और एक गोरे। वह उनका वर्णन कैसे करे, वाणी के आँखें नहीं और आँखों के वाणी नहीं। सयानी सखियाँ हर्षित हुईं, क्योंकि उन्होंने सीता की उत्कंठा जान ली। एक ने कहा, ये वही राजपुत्र होंगे जो कल मुनि के साथ आए थे और जिनके रूप ने पूरे नगर को मोह लिया है। उन्हें अवश्य देखना चाहिए। यह सुनकर दर्शन के लिए सीता के नेत्र अकुला उठे। उसी सखी को आगे करके वे चलीं, और इस पुरानी प्रीति को कोई न जान सका। नारद जी के वचन याद करके पवित्र प्रेम उपजा और वे डरी हुई हिरनी की तरह चकित होकर चारों ओर देखने लगीं।

229.1

देखन बाग कुअँर दुइ आये । बय-किसोर सब भाँति सुहाये ॥
स्याम गौर किमि कहउँ बखानी । गिरा अनयन नयन बिनु बानी ॥

dekhana bāga kuam̐ra dui āye | baya-kisora saba bhām̐ti suhāye ||
syāma gaura kimi kahaum̐ bakhānī | girā anayana nayana binu bānī ||

229.2

सुनि हरषीँ सब सखीं सयानी । सिय हियँ अति उतकंठा जानी ॥
एक कहइ नृप सुत तेइ आली । सुने जे मुनि सँग आये काली ॥

suni haraṣīm̐ saba sakhīṃ sayānī | siya hiyam̐ ati utakaṃṭhā jānī ||
eka kahai nṛpa suta tei ālī | sune je muni sam̐ga āye kālī ||

229.3

जिन्ह निज रूप मोहनी डारी । कीन्ह स्वबस नगर-नर-नारी ॥
बरनत छवि जहँ तहँ सब लोगू । अवसि देखिअहिं देखन जोगू ॥

jinha nija rūpa mohanī ḍārī | kīnha svabasa nagara-nara-nārī ||
baranata chavi jaham̐ taham̐ saba logū | avasi dekhiahiṃ dekhana jogū ||

229.4

तासु वचन अति सियहि सुहाने । दरस लागि लोचन अकुलाने ॥
चलीँ अग्र करि प्रिय सखि सोई । प्रीति पुरातन लखइ न कोई ॥

tāsu vacana ati siyahi suhāne | darasa lāgi locana akulāne ||
calīm̐ agra kari priya sakhi soī | prīti purātana lakhai na koī ||

दो॰ 229दोहा

सुमिरि सीय नारद बचन, उपजी प्रीति पुनीत ।
चकित बिलोकति सकल दिसि, जनु सिसु मृगी सभीत ॥

sumiri sīya nārada bacana, upajī prīti punīta |
cakita bilokati sakala disi, janu sisu mṛgī sabhīta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0