बालकाण्ड

अध्याय 228: सीता गिरिजा-पूजन के लिए आती हैं

5 श्लोक · 228 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सीता गिरिजा-पूजन के लिए आती हैं

दोनों भाई चारों ओर देखकर, मालियों से पूछकर, प्रसन्न मन से पत्ते और फूल चुनने लगे। उसी समय माता की भेजी हुई सीता गिरिजा-पूजन के लिए वहाँ आईं। उनके साथ सुंदर और सयानी सखियाँ मधुर गीत गाती चल रही थीं। सरोवर के पास गिरिजा का मंदिर था, जिसकी शोभा देखकर मन मोहित हो जाता था। सखियों सहित सरोवर में स्नान करके सीता प्रसन्न मन से गौरी के मंदिर गईं। उन्होंने बड़े अनुराग से पूजा की और अपने अनुरूप सुंदर वर माँगा। एक सखी सीता का साथ छोड़कर फुलवारी देखने चली गई थी। उसने दोनों भाइयों को देखा और प्रेम में विह्वल होकर सीता के पास लौटी। उसका पुलकित शरीर और भीगे नेत्र देखकर सखियों ने कोमल वाणी से उसके हर्ष का कारण पूछा।

228.1

चहुँ दिसि चितइ पूँछि मालिगन । लगे लेन दल फूल मुदित मन ॥
तेहि अवसर सीता तहँ आई । गिरिजा पूजन जननि पठाई ॥

cahum̐ disi citai pūm̐chi māligana | lage lena dala phūla mudita mana ||
tehi avasara sītā taham̐ āī | girijā pūjana janani paṭhāī ||

228.2

सङ्ग सखीं सब सुभग सयानी । गावहिँ गीत मनोहर बानी ॥
सर समीप गिरिजा गृह सोहा । बरनि न जाइ देखि मन मोहा ॥

saṅga sakhīṃ saba subhaga sayānī | gāvahim̐ gīta manohara bānī ||
sara samīpa girijā gṛha sohā | barani na jāi dekhi mana mohā ||

228.3

मज्जन करि सर सखिन्ह समेता । गई मुदित मन गौरि निकेता ॥
पूजा कीन्हि अधिक अनुरागा । निज-अनुरूप सुभग बर माँगा ॥

majjana kari sara sakhinha sametā | gaī mudita mana gauri niketā ||
pūjā kīnhi adhika anurāgā | nija-anurūpa subhaga bara mām̐gā ||

228.4

एक सखी सिय सङ्ग बिहाई । गई रही देखन फुलवाई ॥
तेहि दोउ बन्धु बिलोके जाई । प्रेम-बिबस सीता पहिँ आई ॥

eka sakhī siya saṅga bihāī | gaī rahī dekhana phulavāī ||
tehi dou bandhu biloke jāī | prema-bibasa sītā pahim̐ āī ||

दो॰ 228दोहा

तासु दसा देखी सखिन्ह, पुलक-गात जल-नैन ।
कहु कारन निज हरष कर, पूछहिँ सब मृदु बैन ॥

tāsu dasā dekhī sakhinha, pulaka-gāta jala-naina |
kahu kārana nija haraṣa kara, pūchahim̐ saba mṛdu baina ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0