बालकाण्ड

अध्याय 222: सीता के लिए श्रीराम की कामना

5 श्लोक · 222 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सीता के लिए श्रीराम की कामना

श्रीराम की छवि देखकर एक कहती है, जानकी के योग्य यही वर है। सखी, यदि राजा इन्हें देख लें तो प्रण छोड़कर हठपूर्वक यही विवाह करेंगे। दूसरी कहती है, राजा ने इनका सम्मान तो किया है, पर विधि के वश वे प्रण नहीं छोड़ेंगे। तीसरी कहती है, यदि विधाता भला है, जैसा सुनते हैं कि वह सबको उचित फल देता है, तो जानकी को यही वर मिलेगा; इसमें सन्देह नहीं। यदि भाग्य से ऐसा संयोग बने तो सब लोग कृतार्थ हो जाएँ। सखी, इसीलिए हमें इतनी लालसा है कि इस नाते ये कभी कभी यहाँ आया करें। नहीं तो, सुनो सखी, हमारे लिए इनके दर्शन दूर हैं; ऐसा संयोग तभी होता है जब पूर्वजन्मों के बहुत पुण्य हों।

222.1

देखि राम छबि कोउ एक कहई । जोग जानकिहि यह बर अहई ॥
जौँ सखि इन्हहिँ देख नरनाहू । पन परिहरि हठि करइ बिबाहू ॥

dekhi rāma chabi kou eka kahaī | joga jānakihi yaha bara ahaī ||
jaum̐ sakhi inhahim̐ dekha naranāhū | pana parihari haṭhi karai bibāhū ||

222.2

कोउ कह ये भूपति पहिचाने । मुनि समेत सादर सनमाने ॥
सखि परन्तु पन राउ न तजई । बिधि-बस हठि अबिबेकहि भजई ॥

kou kaha ye bhūpati pahicāne | muni sameta sādara sanamāne ||
sakhi parantu pana rāu na tajaī | bidhi-basa haṭhi abibekahi bhajaī ||

222.3

कोउ कह जौँ भल अहइ बिधाता । सब कहँ सुनिय उचित फलदाता ॥
तौ जानकिहि मिलिहि बर एहू । नाहिन आलि इहाँ सन्देहू ॥

kou kaha jaum̐ bhala ahai bidhātā | saba kaham̐ suniya ucita phaladātā ||
tau jānakihi milihi bara ehū | nāhina āli ihām̐ sandehū ||

222.4

जौँ बिधि-बस अस बनइ सँजोगू । तौ कृतकृत्य होहिँ सब लोगू ॥
सखि हमरें आरति अति तातें । कबहुँक ये आवहिँ एहि नातें ॥

jaum̐ bidhi-basa asa banai sam̐jogū | tau kṛtakṛtya hohim̐ saba logū ||
sakhi hamareṃ ārati ati tāteṃ | kabahum̐ka ye āvahim̐ ehi nāteṃ ||

दो॰ 222दोहा

नाहिँ त हम कहँ सुनहु सखि, इन्ह कर दरसन दूरि ।
यह सङ्घट तब होइ जब, पुन्य पुराकृत भूरि ॥

nāhim̐ ta hama kaham̐ sunahu sakhi, inha kara darasana dūri |
yaha saṅghaṭa taba hoi jaba, punya purākṛta bhūri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0