बालकाण्ड

अध्याय 220: झरोखों से निहारती मिथिला की स्त्रियाँ

5 श्लोक · 220 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

झरोखों से निहारती मिथिला की स्त्रियाँ

राजकुमार नगर देखने आए हैं, यह समाचार पुरवासियों को मिलता है। वे सब काम छोड़कर ऐसे दौड़ते हैं मानो कंगाल ख़ज़ाना लूटने चले हों। दोनों भाइयों को देखकर उनकी आँखें सफल होती हैं। युवतियाँ घरों के झरोखों से लगकर प्रेम से श्रीराम का रूप निहारती हैं और आपस में कहती हैं, सखी, इन्होंने करोड़ों कामदेवों की छवि जीत ली है। विष्णु के चार भुजाएँ हैं, ब्रह्मा के चार मुख, और पुरारि शिवजी का वेश विकट और मुख पाँच हैं; सखी, और कोई देवता ऐसा नहीं जिससे इस छवि की उपमा दी जाए। किशोर अवस्था, शोभा के धाम, श्याम और गौर सुख के धाम; इनके अंग अंग पर करोड़ों कामदेव निछावर कर दिए जाएँ।

220.1

देखन नगर भूप-सुत आये । समाचार पुरबासिन्ह पाये ॥
धाये धाम काम सब त्यागी । मनहुँ रङ्क निधि लूटन लागी ॥

dekhana nagara bhūpa-suta āye | samācāra purabāsinha pāye ||
dhāye dhāma kāma saba tyāgī | manahum̐ raṅka nidhi lūṭana lāgī ||

220.2

निरखि सहज सुन्दर दोउ भाई । होहिँ सुखी लोचन फल पाई ॥
जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीँ । निरखहिँ राम रूप अनुरागीँ ॥

nirakhi sahaja sundara dou bhāī | hohim̐ sukhī locana phala pāī ||
jubatīṃ bhavana jharokhanhi lāgīm̐ | nirakhahim̐ rāma rūpa anurāgīm̐ ||

220.3

कहहिँ परसपर बचन सप्रीती । सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती ॥
सुर नर असुर नाग मुनि माहीँ । सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीँ ॥

kahahim̐ parasapara bacana saprītī | sakhi inha koṭi kāma chabi jītī ||
sura nara asura nāga muni māhīm̐ | sobhā asi kahum̐ suniati nāhīm̐ ||

220.4

बिष्नु चारि भुज बिघि मुख चारी । बिकट-बेष मुख-पञ्च पुरारी ॥
अपर देव अस कोउ न आही । यह छबि सखी पटतरिअ जाही ॥

biṣnu cāri bhuja bighi mukha cārī | bikaṭa-beṣa mukha-pañca purārī ||
apara deva asa kou na āhī | yaha chabi sakhī paṭataria jāhī ||

दो॰ 220दोहा

बय किसोर सुखमा-सदन, स्याम गौर सुख-घाम ।
अङ्ग अङ्ग पर वारिअहिं, कोटि कोटि सत काम ॥

baya kisora sukhamā-sadana, syāma gaura sukha-ghāma |
aṅga aṅga para vāriahiṃ, koṭi koṭi sata kāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0