नगर की सुन्दरता कही नहीं जाती; मन जहाँ जाता है, वहीं लुभा जाता है। बाज़ारों में मणियों के छज्जे ऐसे हैं मानो ब्रह्मा ने अपने हाथ से सँवारे हों, और कुबेर जैसे धनी व्यापारी अनेक वस्तुएँ लिए बैठे हैं। गलियाँ सदा सुगन्ध से सींची रहती हैं और भवन ऐसे चित्रित हैं मानो कामदेव ने चित्र बनाए हों। नगर के नर नारी सुन्दर, पवित्र, धर्मशील और ज्ञानी हैं। जनक का निवास देखकर देवता भी चकित होते हैं और परकोटा मानो सब लोकों की शोभा रोके खड़ा है। मणि और सोने के परदों वाले उजले महल हैं; सीताजी के निवास वाले भवन की शोभा कैसे कही जाए?