अरुन नयन उर बाहु बिसाला । नील जलद तनु स्याम तमाला ॥
कटि पट पीत कसें बर भाथा । रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा ॥
aruna nayana ura bāhu bisālā | nīla jalada tanu syāma tamālā ||
kaṭi paṭa pīta kaseṃ bara bhāthā | rucira cāpa sāyaka duhum̐ hāthā ||
5 श्लोक · 209 में से 361
लम्बी भुजाएँ, मेघ जैसा श्याम शरीर, कमर में पीताम्बर और हाथों में धनुष बाण लिए श्रीराम चलते हैं। दोनों भाइयों को पाकर विश्वामित्र मानो महानिधि पा गए; वे सोचते हैं, मेरे लिए भगवान ने पिता को छोड़ दिया। मार्ग में मुनि ताड़का को दिखाते हैं, जो क्रोध से दौड़ती आती है। श्रीराम एक ही बाण से उसके प्राण हर लेते हैं और उसे दीन जानकर अपना धाम देते हैं। तब ऋषि अपने स्वामी को पहचानकर उन्हें वह विद्या देते हैं जिससे भूख प्यास नहीं लगती और शरीर में अतुलित बल और तेज रहता है। सब आयुध समर्पित करके वे प्रभु को आश्रम ले आते हैं और भक्ति से कन्द, मूल, फल खिलाते हैं।
अरुन नयन उर बाहु बिसाला । नील जलद तनु स्याम तमाला ॥
कटि पट पीत कसें बर भाथा । रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा ॥
aruna nayana ura bāhu bisālā | nīla jalada tanu syāma tamālā ||
kaṭi paṭa pīta kaseṃ bara bhāthā | rucira cāpa sāyaka duhum̐ hāthā ||
स्याम गौर सुन्दर दोउ भाई । बिस्वामित्र महानिधि पाई ॥
प्रभु ब्रह्मन्य-देव मैँ जाना । मोहि हित पिता तजेउ भगवाना ॥
syāma gaura sundara dou bhāī | bisvāmitra mahānidhi pāī ||
prabhu brahmanya-deva maim̐ jānā | mohi hita pitā tajeu bhagavānā ||
चले जात मुनि दीन्हि दिखाई । सुनि ताड़का क्रोध करि धाई ॥
एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा । दीन जानि तेहि निज-पद दीन्हा ॥
cale jāta muni dīnhi dikhāī | suni tār̤akā krodha kari dhāī ||
ekahiṃ bāna prāna hari līnhā | dīna jāni tehi nija-pada dīnhā ||
तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही । बिद्यानिधि कहँ बिद्या दीन्ही ॥
जा तेँ लाग न छुधा पिपासा । अतुलित-बल तनु तेज प्रकासा ॥
taba riṣi nija nāthahi jiyam̐ cīnhī | bidyānidhi kaham̐ bidyā dīnhī ||
jā tem̐ lāga na chudhā pipāsā | atulita-bala tanu teja prakāsā ||
आयुध सर्ब समर्पि कै, प्रभु निज आस्त्रम आनि ।
कन्द मूल फल भोजन, दीन्ह भगति हित जानि ॥
āyudha sarba samarpi kai, prabhu nija āstrama āni |
kanda mūla phala bhojana, dīnha bhagati hita jāni ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0