बालकाण्ड

अध्याय 203: भोजन छोड़कर भागते बालक राम

6 श्लोक · 203 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

भोजन छोड़कर भागते बालक राम

हरि ने बहुत सी बाललीलाएँ कीं और अपने दासों को आनन्द दिया। सब भाई बड़े हुए; गुरु ने चूड़ाकर्म संस्कार किया और ब्राह्मणों ने बहुत दक्षिणा पाई। जो प्रभु मन और वचन से परे हैं, वही दशरथ के आँगन में विचरते हैं। भोजन के समय राजा बुलाते हैं तो वे बालसखाओं को छोड़कर नहीं आते। कौसल्या बुलाने जाती हैं तो प्रभु ठुमक ठुमक कर भाग जाते हैं; जिन्हें वेद नेति नेति कहते हैं और शिवजी जिनका अन्त नहीं पाते, उन्हें माता दौड़कर पकड़ती हैं। धूल भरे शरीर से आते हैं तो राजा हँसकर गोद में बिठा लेते हैं। खाते हुए चंचल मन से मौका पाकर वे किलकारी मारते भाग जाते हैं, मुख पर दही-भात लिपटा है।

203.1

बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा । अति अनन्द दासन्ह कहँ दीन्हा ॥
कछुक काल बीतें सब भाई । बड़े भये परिजन सुखदाई ॥

bālacarita hari bahubidhi kīnhā | ati ananda dāsanha kaham̐ dīnhā ||
kachuka kāla bīteṃ saba bhāī | bar̤e bhaye parijana sukhadāī ||

203.2

चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई । बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई ॥
परम मनोहर चरित अपारा । करत फिरत चारिउ सुकुमारा ॥

cūr̤ākarana kīnha guru jāī | bipranha puni dachinā bahu pāī ||
parama manohara carita apārā | karata phirata cāriu sukumārā ||

203.3

मन-क्रम-बचन अगोचर जोई । दसरथ-अजिर बिचर प्रभु सोई ॥
भोजन करत बोल जब राजा । नहिँ आवत तजि बाल-समाजा ॥

mana-krama-bacana agocara joī | dasaratha-ajira bicara prabhu soī ||
bhojana karata bola jaba rājā | nahim̐ āvata taji bāla-samājā ||

203.4

कौसल्या जब बोलन जाई । ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिँ पराई ॥
निगम नेति सिव अन्त न पावा । ताहि धरै जननी हठि धावा ॥

kausalyā jaba bolana jāī | ṭhumaku ṭhumaku prabhu calahim̐ parāī ||
nigama neti siva anta na pāvā | tāhi dharai jananī haṭhi dhāvā ||

203.5

धूरस धूरि भरें तनु आये । भूपति बिहँसि गोद बैठाये ॥

dhūrasa dhūri bhareṃ tanu āye | bhūpati biham̐si goda baiṭhāye ||

दो॰ 203दोहा

भोजन करत चपल चित, इत उत अवसर पाइ ।
भाजि चले किलकत मुख, दधि-ओदन लपटाइ ॥

bhojana karata capala cita, ita uta avasara pāi |
bhāji cale kilakata mukha, dadhi-odana lapaṭāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0