इस प्रकार जगत के माता पिता श्रीराम कोसलपुर के वासियों को सुख देते हैं। शिवजी भवानी से कहते हैं कि जिन्होंने रघुनाथ के चरणों से प्रीति की, उनकी यही गति है। रघुपति से विमुख होकर कौन करोड़ों यत्न करके भी संसार का बन्धन छुड़ा सकता है? जो माया सब चर अचर को वश में रखती है, वह प्रभु से डरती है और उनकी भौंह के इशारे पर नाचती है। ऐसे प्रभु को छोड़कर किसे भजें? चतुराई छोड़कर मन, कर्म और वचन से भजने पर रघुराई कृपा करेंगे। कौसल्या उन्हें कभी गोद में हिलाती हैं, कभी पालने में झुलाती हैं; प्रेम में मग्न माता को दिन रात बीतते पता नहीं चलता और वे बाललीला गाती रहती हैं।