आखर मधुर मनोहर दोऊ । बरन बिलोचन जन जिय जोऊ ॥
सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू । लोक-लाहु परलोक-निबाहू ॥
ākhara madhura manohara doū | barana bilocana jana jiya joū ||
sumirata sulabha sukhada saba kāhū | loka-lāhu paraloka-nibāhū ||
5 श्लोक · 20 में से 361
राम नाम के दोनों अक्षर मधुर हैं, वर्णमाला के नेत्र और भक्तों के जीवन। वे स्मरण में सुलभ हैं, इस लोक में लाभ और परलोक में निर्वाह देते हैं। तुलसी को वे राम और लक्ष्मण के समान प्रिय हैं। अलग कहे जाने पर भी वे ब्रह्म और जीव की तरह सहज साथी हैं। वे नर और नारायण जैसे भाई हैं, भक्ति रूपी स्त्री के कर्णफूल, और जगत के हित के लिए चन्द्रमा और सूर्य। वे अमृत के स्वाद और तृप्ति जैसे हैं, पृथ्वी को धारण करने वाले कच्छप और शेष जैसे, भक्त के मन रूपी कमल के भौंरे जैसे, और जीभ रूपी यशोदा के लिए कृष्ण और बलराम जैसे। दोहा कहता है कि सब अक्षरों पर एक छत्र है और दूसरा मुकुटमणि।
आखर मधुर मनोहर दोऊ । बरन बिलोचन जन जिय जोऊ ॥
सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू । लोक-लाहु परलोक-निबाहू ॥
ākhara madhura manohara doū | barana bilocana jana jiya joū ||
sumirata sulabha sukhada saba kāhū | loka-lāhu paraloka-nibāhū ||
कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके । राम-लखन-सम प्रिय तुलसी के ॥
बरनत बरन प्रीति बिलगाती । ब्रह्म-जीव-सम सहज-सँघाती ॥
kahata sunata sumirata suṭhi nīke | rāma-lakhana-sama priya tulasī ke ||
baranata barana prīti bilagātī | brahma-jīva-sama sahaja-sam̐ghātī ||
नर-नारायन-सरिस सुभ्राता । जग पालक बिसेष जन त्राता ॥
भगति-सुतिय कल करन-बिभूषन । जग-हित-हेतु बिमल बिधु-पूषन ॥
nara-nārāyana-sarisa subhrātā | jaga pālaka biseṣa jana trātā ||
bhagati-sutiya kala karana-bibhūṣana | jaga-hita-hetu bimala bidhu-pūṣana ||
स्वाद तोष सम सुगति सुधा के । कमठ सेष सम धर बसुधा के ॥
जन-मन-मञ्जु-कञ्ज-मधु कर से । जीह जसोमति हरि हलधर से ॥
svāda toṣa sama sugati sudhā ke | kamaṭha seṣa sama dhara basudhā ke ||
jana-mana-mañju-kañja-madhu kara se | jīha jasomati hari haladhara se ||
एक छत्र एक मुकुट-मनि, सब बरननि पर जोउ ।
तुलसी रघुबर नाम के, बरन बिराजत दोउ ॥
eka chatra eka mukuṭa-mani, saba baranani para jou |
tulasī raghubara nāma ke, barana birājata dou ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0