बन्दउँ नाम राम रघुबर को । हेतु कृसानु-भानु-हिमकर को ॥
बिधि-हरि-हर-मय-बेद-प्रान सो । अगुन अनूपम गुन-निधान सो ॥
bandaum̐ nāma rāma raghubara ko | hetu kṛsānu-bhānu-himakara ko ||
bidhi-hari-hara-maya-beda-prāna so | aguna anūpama guna-nidhāna so ||
5 श्लोक · 19 में से 361
तुलसीदास राम नाम को प्रणाम करते हैं, जिसमें अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा के बीज हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव का रूप और वेदों का प्राण है। यही वह महामन्त्र है जिसे महेश जपते हैं और काशी में मुक्ति के लिए देते हैं। इसी के प्रभाव से गणेश सबसे पहले पूजे जाते हैं। वाल्मीकि उलटा नाम जपकर पवित्र हुए। शिव से यह सुनकर कि एक राम नाम सहस्र नाम के बराबर है, भवानी ने नाम जपकर ही पति के साथ भोजन किया, और प्रसन्न शिव ने उन्हें अपने अंग का भूषण बना लिया। नाम का प्रभाव जानकर ही उन्होंने कालकूट पिया और वह अमृत हो गया। दोहा कहता है कि भक्ति वर्षा ऋतु है, सेवक धान हैं, और नाम के दो अक्षर सावन और भादों हैं।
बन्दउँ नाम राम रघुबर को । हेतु कृसानु-भानु-हिमकर को ॥
बिधि-हरि-हर-मय-बेद-प्रान सो । अगुन अनूपम गुन-निधान सो ॥
bandaum̐ nāma rāma raghubara ko | hetu kṛsānu-bhānu-himakara ko ||
bidhi-hari-hara-maya-beda-prāna so | aguna anūpama guna-nidhāna so ||
महा मन्त्र जोइ जपत महेसू । कासीं मुकुति हेतु उपदेसू ॥
महिमा जासु जान गनराऊ । प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ ॥
mahā mantra joi japata mahesū | kāsīṃ mukuti hetu upadesū ||
mahimā jāsu jāna ganarāū | prathama pūjiata nāma prabhāū ||
जान आदिकबि नाम-प्रतापू । भयउ सुद्ध करि उलटा जापू ॥
सहस-नाम-सम सुनि सिव बानी । जपि जेई पिय सङ्ग भवानी ॥
jāna ādikabi nāma-pratāpū | bhayau suddha kari ulaṭā jāpū ||
sahasa-nāma-sama suni siva bānī | japi jeī piya saṅga bhavānī ||
हरषे हेतु हेरि हर ही को । किय भूषन तिय भूषन ती को ॥
नाम प्रभाव जान सिव नीको । कालकूट फल दीन्ह अमी को ॥
haraṣe hetu heri hara hī ko | kiya bhūṣana tiya bhūṣana tī ko ||
nāma prabhāva jāna siva nīko | kālakūṭa phala dīnha amī ko ||
बरषा रितु रघुपति भगति, तुलसी सालि सुदास ।
राम नाम बर बरन जुग, सावन भादवँ मास ॥
baraṣā ritu raghupati bhagati, tulasī sāli sudāsa |
rāma nāma bara barana juga, sāvana bhādavam̐ māsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0