बालकाण्ड

अध्याय 166: ब्राह्मणों को वश करने का उपाय

5 श्लोक · 166 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

ब्राह्मणों को वश करने का उपाय

कपटी तपस्वी चेताता है, हे राजन, इसलिए मैं तुम्हें मना करता हूँ, यह कथा कहने से तुम्हारी बड़ी हानि होगी। यह बात छठे कान में पड़ी तो तुम्हारा नाश होगा, मेरा वचन सत्य है। यह बात प्रकट हो या ब्राह्मण शाप दे, इन्हीं से तुम्हारा नाश होगा, और किसी उपाय से नहीं, चाहे हरि और हर भी क्रोध करें। राजा ने चरण पकड़कर कहा, नाथ, सत्य है, ब्राह्मण और गुरु के कोप से कौन बचा सकता है? मेरा मन एक ही डर से घबराता है, ब्राह्मण का शाप बड़ा भयानक है। कृपा करके बताइए, ब्राह्मण किस विधि वश में हों, आपके सिवा मुझे कोई हितैषी नहीं दिखता।

166.1

ता तेँ मैँ तोहि बरजउँ राजा । कहें कथा तव परम अकाजा ॥
छठेँ स्त्रवन यह परत कहानी । नास तुम्हार सत्य मम बानी ॥

tā tem̐ maim̐ tohi barajaum̐ rājā | kaheṃ kathā tava parama akājā ||
chaṭhem̐ stravana yaha parata kahānī | nāsa tumhāra satya mama bānī ||

166.2

यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा । नास तोर सुनु भानुप्रतापा ॥
आन उपायँ निधन तव नाहीँ । जौँ हरि हर कोपहिँ मन माहीँ ॥

yaha pragaṭeṃ athavā dvijaśrāpā | nāsa tora sunu bhānupratāpā ||
āna upāyam̐ nidhana tava nāhīm̐ | jaum̐ hari hara kopahim̐ mana māhīm̐ ||

166.3

सत्य नाथ पद-गहि नृप भाखा । द्विज-गुरु-कोप कहहु को राखा ॥
राखइ गुरु जौँ कोप बिधाता । गुरु-बिरोध नहिँ कोउ जग त्राता ॥

satya nātha pada-gahi nṛpa bhākhā | dvija-guru-kopa kahahu ko rākhā ||
rākhai guru jaum̐ kopa bidhātā | guru-birodha nahim̐ kou jaga trātā ||

166.4

जौँ न चलब हम कहे तुम्हारें । होउ नास नहिँ सोच हमारें ॥
एकहिं हर डरपत मन मोरा । प्रभु महिदेव-साप अति घोरा ॥

jaum̐ na calaba hama kahe tumhāreṃ | hou nāsa nahim̐ soca hamāreṃ ||
ekahiṃ hara ḍarapata mana morā | prabhu mahideva-sāpa ati ghorā ||

दो॰ 166दोहा

होहिं बिप्र बस कवनि विधि, कहहु कृपा करि सोउ ।
तुम्ह तजि दीनदयाल निज, हितू न देखउँ कोउँ ॥

hohiṃ bipra basa kavani vidhi, kahahu kṛpā kari sou |
tumha taji dīnadayāla nija, hitū na dekhaum̐ koum̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0