कह तापस नृप ऐसेइ होऊ । कारन एक कठिन सुनु सोऊ ॥
कालउ तव-पद नाइहि सीसा । एक बिप्र-कुल छाड़ि महीसा ॥
kaha tāpasa nṛpa aisei hoū | kārana eka kaṭhina sunu soū ||
kālau tava-pada nāihi sīsā | eka bipra-kula chār̤i mahīsā ||
5 श्लोक · 165 में से 361
तपस्वी बोला, हे राजन, ऐसा ही हो, पर एक कठिन बात सुनो। काल भी तुम्हारे चरणों में सिर नवाएगा, केवल ब्राह्मणकुल को छोड़कर। तप के बल से ब्राह्मण सदा बलवान रहते हैं, उनके क्रोध से कोई रक्षक नहीं। हे नरेश, यदि तुम ब्राह्मणों को वश में कर लो, तो ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी तुम्हारे वश में होंगे। ब्राह्मणकुल से जबरदस्ती नहीं चलती, मैं दोनों भुजाएँ उठाकर सत्य कहता हूँ। हे महीपाल, ब्राह्मण के शाप बिना तुम्हारा नाश किसी काल में नहीं होगा। उसके वचन सुनकर राजा प्रसन्न हुए और बोले, हे नाथ, अब मेरा नाश नहीं होगा। हे कृपानिधान प्रभु, आपकी कृपा से मेरा सदा कल्याण होगा। ऐसा ही हो, कहकर वह कुटिल कपटी मुनि फिर बोला, हमारा मिलना और तुम्हारा भूलना किसी से कहोगे, तो हमारा दोष नहीं।
कह तापस नृप ऐसेइ होऊ । कारन एक कठिन सुनु सोऊ ॥
कालउ तव-पद नाइहि सीसा । एक बिप्र-कुल छाड़ि महीसा ॥
kaha tāpasa nṛpa aisei hoū | kārana eka kaṭhina sunu soū ||
kālau tava-pada nāihi sīsā | eka bipra-kula chār̤i mahīsā ||
तप बल बिप्र सदा बरिआरा । तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा ॥
जौँ बिप्रन्ह बस करहु नरेसा । तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा ॥
tapa bala bipra sadā bariārā | tinha ke kopa na kou rakhavārā ||
jaum̐ bipranha basa karahu naresā | tau tua basa bidhi biṣnu mahesā ||
चल न ब्रह्म-कुल सन बरिआई । सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई ॥
विप्र साप बिनु सुनु महिपाला । तोर नास नहिँ कवनेहुँ काला ॥
cala na brahma-kula sana bariāī | satya kahaum̐ dou bhujā uṭhāī ||
vipra sāpa binu sunu mahipālā | tora nāsa nahim̐ kavanehum̐ kālā ||
हरषेउ राउ बचन सुनि तासू । नाथ न होइ मोर अब नासू ॥
तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना । मो कहँ सर्ब काल कल्याना ॥
haraṣeu rāu bacana suni tāsū | nātha na hoi mora aba nāsū ||
tava prasāda prabhu kṛpānidhānā | mo kaham̐ sarba kāla kalyānā ||
एवमस्तु कहि कपट-मुनि, बोला कुटिल बहोरि ।
मिलव-हमार भुलाब-निज, कहहु त हमहिँ न खोरि ॥
evamastu kahi kapaṭa-muni, bolā kuṭila bahori |
milava-hamāra bhulāba-nija, kahahu ta hamahim̐ na khori ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0