बालकाण्ड

अध्याय 163: तपबल की बातें और राजा मोहित

5 श्लोक · 163 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

तपबल की बातें और राजा मोहित

कपटी तपस्वी कहता है, हे पुत्र, मन में आश्चर्य मत करो, तप से कुछ भी दुर्लभ नहीं। तप के बल से ब्रह्मा जगत रचते हैं, तप के बल से विष्णु उसके रक्षक बने, तप के बल से शम्भु संहार करते हैं, संसार में तप से कुछ भी अगम नहीं। यह सुनकर राजा को बड़ा अनुराग हुआ और वह पुरानी कथाएँ कहने लगा। उसने धर्म, कर्म और अनेक इतिहासों का निरूपण किया, और सृष्टि, पालन और प्रलय की अपार आश्चर्य भरी कथाएँ सुनाईं। सुनकर राजा तपस्वी के वश में हो गए और अपना नाम बताने लगे। तपस्वी बोला, राजन, मैं तुम्हें जानता हूँ, तुमने कपट किया, वह मुझे अच्छा लगा। राजा अपना नाम हर जगह नहीं बताते। तुम्हारी यह चतुराई देखकर मेरा तुम पर अत्यन्त प्रेम है।

163.1

जनि आचरज करहु मन माहीँ । सुत तप तेँ दुर्लभ कछु नाहीँ ॥
तप बल तेँ जग सृजइ विधाता । तप बल बिष्नु भये परित्राता ॥

jani ācaraja karahu mana māhīm̐ | suta tapa tem̐ durlabha kachu nāhīm̐ ||
tapa bala tem̐ jaga sṛjai vidhātā | tapa bala biṣnu bhaye paritrātā ||

163.2

तप बल सम्भु करहिँ सङ्घारा । तप तेँ अगम न कछु संसारा ॥
भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा । कथा पुरातन कहइ सो लागा ॥

tapa bala sambhu karahim̐ saṅghārā | tapa tem̐ agama na kachu saṃsārā ||
bhayau nṛpahi suni ati anurāgā | kathā purātana kahai so lāgā ||

163.3

करम धरम करम इतिहास अनेका । करइ निरूपन बिरति बिबेका ॥
उदभव-पावन-प्रलय कहानी । कहेसि अमित आचरज बखानी ॥

karama dharama karama itihāsa anekā | karai nirūpana birati bibekā ||
udabhava-pāvana-pralaya kahānī | kahesi amita ācaraja bakhānī ||

163.4

सुनि महिप तापस बस भयऊ । आपन नाम कहन तब लयऊ ॥
कह तापस नृप जानउँ तोही । कीन्हेहु कपट लाग भल मोही ॥

suni mahipa tāpasa basa bhayaū | āpana nāma kahana taba layaū ||
kaha tāpasa nṛpa jānaum̐ tohī | kīnhehu kapaṭa lāga bhala mohī ||

163.सो॰ 163सोरठा

सुनु महीस असि नीति, जहँ तहँ नाम न कहहिँ नृप ।
मोहि तोहि पर अति प्रीति, सोइ चतुरता बिचारि तव ॥

sunu mahīsa asi nīti, jaham̐ taham̐ nāma na kahahim̐ nṛpa |
mohi tohi para ati prīti, soi caturatā bicāri tava ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0