बालकाण्ड

अध्याय 162: कपटी का नाम एकतनु

5 श्लोक · 162 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कपटी का नाम एकतनु

कपटी तपस्वी आगे कहता है, इसलिए मैं जगत में छिपा रहता हूँ, हरि को छोड़ मुझे किसी से कोई प्रयोजन नहीं। प्रभु बिना बताए ही सब जानते हैं। तुम मुझे प्रिय हो। हे तात, अब यदि मैं तुमसे कुछ छिपाऊँ तो मुझे भारी दोष लगेगा। जैसे जैसे वह तपस्वी उदासीनता की बातें करता, वैसे वैसे राजा को विश्वास होता जाता। जब उसने देखा कि राजा कर्म, मन और वचन से उसके वश में हो गए, तब बगुले जैसा ध्यान लगाने वाला वह कपटी बोला, भाई, मेरा नाम एकतनु है। राजा ने सिर नवाकर कहा, मुझे अपना सेवक जानकर नाम का अर्थ समझाइए। उसने कहा, जब सृष्टि आरम्भ हुई, तभी मेरी उत्पत्ति हुई, और तब से मैंने दूसरी देह नहीं धरी, इसी से मेरा नाम एकतनु है।

162.1

ता तेँ गुपुत रहउँ जग माहीँ । हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीँ ॥
प्रभु जानत सब बिनहिँ जनाये । कहहु कवन सिधि लोक रिझाये ॥

tā tem̐ guputa rahaum̐ jaga māhīm̐ | hari taji kimapi prayojana nāhīm̐ ||
prabhu jānata saba binahim̐ janāye | kahahu kavana sidhi loka rijhāye ||

162.2

तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें । प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें ॥
अब जौँ तात दुरावउँ तोही । दारुन दोष घटइ अति मोही ॥

tumha suci sumati parama priya moreṃ | prīti pratīti mohi para toreṃ ||
aba jaum̐ tāta durāvaum̐ tohī | dāruna doṣa ghaṭai ati mohī ||

162.3

जिमि जिमि तापस कथइ उदासा । तिमि तिमि नृपहि उपज विस्वासा ॥
देखा स्वबस करम-मन-बानी । तब बोला तापस बगध्यानी ॥

jimi jimi tāpasa kathai udāsā | timi timi nṛpahi upaja visvāsā ||
dekhā svabasa karama-mana-bānī | taba bolā tāpasa bagadhyānī ||

162.4

नाम हमार एकतनु भाई । सुनि नृप बोले पुनि सिर नाई ॥
कहहु नाम कर अरथ बखानी । मोहि सेवक अति आपन जानी ॥

nāma hamāra ekatanu bhāī | suni nṛpa bole puni sira nāī ||
kahahu nāma kara aratha bakhānī | mohi sevaka ati āpana jānī ||

दो॰ 162दोहा

आदि सृष्टि उपजी जबहिँ, तब उतपति भइ मोरि ।
नाम एकतनु हेतु तेहि, देह न धरी बहोरि ॥

ādi sṛṣṭi upajī jabahim̐, taba utapati bhai mori |
nāma ekatanu hetu tehi, deha na dharī bahori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0