बालकाण्ड

अध्याय 161: कपटमुनि पर राजा का विश्वास

6 श्लोक · 161 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कपटमुनि पर राजा का विश्वास

राजा बोले, जो विज्ञान के भण्डार और आप जैसे अभिमानरहित होते हैं, वे सदा अपने को छिपाए रहते हैं। इसीलिए सन्त और वेद पुकारकर कहते हैं कि परम अकिंचन ही हरि को प्रिय हैं। आप जो भी हों, मैं आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ, हे स्वामी, मुझ पर कृपा कीजिए। राजा की सहज प्रीति और अपने ऊपर विशेष विश्वास देखकर वह स्नेह जताकर बोला, अब तक न कोई मुझसे मिला, न मैं किसी को अपना पता देता हूँ। लोक में मान आग के समान है, जो तपरूपी वन को जला देता है। तुलसीदास कहते हैं, सुन्दर वेष देखकर मूढ़ ही नहीं, चतुर भी भूल जाते हैं, मोर को देखो, वाणी अमृत जैसी और भोजन साँप।

161.1

कह नृप जे बिज्ञान निधाना । तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना ॥
सदा रहहिँ अपनपौ सदा दुराये । सब बिधि कुसल कुबेष बनाये ॥

kaha nṛpa je bijñāna nidhānā | tumha sārikhe galita abhimānā ||
sadā rahahim̐ apanapau sadā durāye | saba bidhi kusala kubeṣa banāye ||

161.2

तेहि तेँ कहहिँ सन्त स्त्रुति टेरें । परम अकिञ्चन प्रिय हरि केरें ॥
तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा । होत बिरञ्चि सिवहि सन्देहा ॥

tehi tem̐ kahahim̐ santa struti ṭereṃ | parama akiñcana priya hari kereṃ ||
tumha sama adhana bhikhāri agehā | hota birañci sivahi sandehā ||

161.3

जोसि सोसि तव चरन नमामी । मो पर कृपा करिय अब स्वामी ॥
सहज प्रीति भूपति कै देखी । आपु विषय विस्वास बिसेखी ॥

josi sosi tava carana namāmī | mo para kṛpā kariya aba svāmī ||
sahaja prīti bhūpati kai dekhī | āpu viṣaya visvāsa bisekhī ||

161.4

सब प्रकार राजहि अपनाई । बोलेउ अधिक सनेह जनाई ॥
सुनु सतिभाउ कहउँ महिपाला । इहाँ बसत बीते बहु काला ॥

saba prakāra rājahi apanāī | boleu adhika saneha janāī ||
sunu satibhāu kahaum̐ mahipālā | ihām̐ basata bīte bahu kālā ||

दो॰ 161 (क)दोहा

अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ, मैँ न जनावउँ काहु ।
लोकमान्यता अनल सम, कर तप-कानन दाहु ॥

aba lagi mohi na mileu kou, maim̐ na janāvaum̐ kāhu |
lokamānyatā anala sama, kara tapa-kānana dāhu ||

161.सो॰ 161 (ख)सोरठा

तुलसी देखि सुबेखु, भूलहिँ मूढ़ न चतुर नर ।
सुन्दर केकिहि पेखु, बचन सुधा-सम असन-अहि ॥

tulasī dekhi subekhu, bhūlahim̐ mūr̤ha na catura nara |
sundara kekihi pekhu, bacana sudhā-sama asana-ahi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0