बालकाण्ड

अध्याय 154: प्रतापभानु की दिग्विजय

5 श्लोक · 154 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

प्रतापभानु की दिग्विजय

राजा के हितकारी, बुद्धिमान मन्त्री का नाम धर्मरुचि था, जो शुक्राचार्य के समान था। राजा के साथ अपार चतुरंगिणी सेना थी, जिसमें युद्ध में जूझने वाले अगणित योद्धा थे। सेना देखकर राजा प्रसन्न हुए और नगाड़े बजे। विजय के लिए सेना सजाकर, शुभ दिन साधकर राजा डंका बजाते हुए चले। जहाँ तहाँ अनेक युद्ध हुए और उन्होंने सब राजाओं को बलपूर्वक जीत लिया। अपनी भुजाओं के बल से सातों द्वीप वश में कर लिए और राजाओं से दण्ड लेकर उन्हें छोड़ दिया। उस समय सारे भूमण्डल के एकमात्र राजा प्रतापभानु थे। भुजबल से विश्व को वश में करके उन्होंने अपने नगर में प्रवेश किया। राजा समय के अनुसार अर्थ, धर्म और काम के सुख का सेवन करते थे।

154.1

नृप-हित-कारक सचिव सयाना । नाम धरमरुचि सुक्र समाना ॥
सचिव सयान बन्धु-बल-बीरा । आपु प्रताप-पुञ्ज रनधीरा ॥

nṛpa-hita-kāraka saciva sayānā | nāma dharamaruci sukra samānā ||
saciva sayāna bandhu-bala-bīrā | āpu pratāpa-puñja ranadhīrā ||

154.2

सेन सङ्ग चतुरङ्ग अपारा । अमित सुभट सब समर जुझारा ॥
सेन बिलोकि राउ हरषाना । अरु बाजे गहगहे निसाना ॥

sena saṅga caturaṅga apārā | amita subhaṭa saba samara jujhārā ||
sena biloki rāu haraṣānā | aru bāje gahagahe nisānā ||

154.3

बिजय हेतु कटकई बनाई । सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई ॥
जहँ तहँ परीं अनेक लराईं । जीते सकल भूप बरिआई ॥

bijaya hetu kaṭakaī banāī | sudina sādhi nṛpa caleu bajāī ||
jaham̐ taham̐ parīṃ aneka larāīṃ | jīte sakala bhūpa bariāī ||

154.4

सप्त-दीप भुज-बल बस कीन्हे । लेइ लेइ दंड छाडि नृप दीन्हें ॥
सकल अवनि-मंडल तेहि काला । एक प्रताप-भानु महिपाला ॥

sapta-dīpa bhuja-bala basa kīnhe | lei lei daṃḍa chāḍi nṛpa dīnheṃ ||
sakala avani-maṃḍala tehi kālā | eka pratāpa-bhānu mahipālā ||

दो॰ 154दोहा

स्वबस बिस्व करि बाहु बल, निज-पुर कीन्ह प्रबेस ।
अरथ-धरम-कामादि सुख, सेवइ समयँ नरेस ॥

svabasa bisva kari bāhu bala, nija-pura kīnha prabesa |
aratha-dharama-kāmādi sukha, sevai samayam̐ naresa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0