देखि प्रीति सुनि बचन अमोले । एवमस्तु करुनानिधि बोले ॥
आपु सरिस खोजौं कहँ जाई । नृप तव तनय होब मैँ आई ॥
dekhi prīti suni bacana amole | evamastu karunānidhi bole ||
āpu sarisa khojauṃ kaham̐ jāī | nṛpa tava tanaya hoba maim̐ āī ||
5 श्लोक · 150 में से 361
प्रेम देखकर और अमोल वचन सुनकर करुणानिधि बोले, ऐसा ही हो। अपने समान मैं कहाँ खोजने जाऊँ? हे राजन, मैं स्वयं आकर तुम्हारा पुत्र बनूँगा। फिर शतरूपा को देखकर हाथ जोड़े और कहा, हे देवि, जो वर तुम्हें रुचे वह माँगो। शतरूपा बोलीं, हे नाथ, चतुर राजा ने जो वर माँगा, वह मुझे भी बहुत प्रिय लगा। परन्तु प्रभु, यह बड़ी ढिठाई है। आप ब्रह्मा आदि के भी पिता, जगत के स्वामी और सबके हृदय में बसने वाले ब्रह्म हैं। यह सोचकर संशय होता है। हे नाथ, आपके निज भक्त जो सुख पाते हैं और जो गति पाते हैं, कृपा करके हमें वही सुख, वही गति, वही भक्ति, वही चरणों का प्रेम, वही विवेक और वही रहनी दीजिए।
देखि प्रीति सुनि बचन अमोले । एवमस्तु करुनानिधि बोले ॥
आपु सरिस खोजौं कहँ जाई । नृप तव तनय होब मैँ आई ॥
dekhi prīti suni bacana amole | evamastu karunānidhi bole ||
āpu sarisa khojauṃ kaham̐ jāī | nṛpa tava tanaya hoba maim̐ āī ||
सतरूपहि बिलोकि कर जोरें । देबि माँगु बर जो रुचि तोरे ॥
जो बर नाथ चतुर नृप माँगा । सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा ॥
satarūpahi biloki kara joreṃ | debi mām̐gu bara jo ruci tore ||
jo bara nātha catura nṛpa mām̐gā | soi kṛpāla mohi ati priya lāgā ||
प्रभु परन्तु सुठि होति ढिठाई । जदपि भगत-हित तुम्हहिँ सोहाई ॥
तुम्ह ब्रह्मादि-जनक जग स्वामी । ब्रह्म सकल-उर-अन्तरजामी ॥
prabhu parantu suṭhi hoti ḍhiṭhāī | jadapi bhagata-hita tumhahim̐ sohāī ||
tumha brahmādi-janaka jaga svāmī | brahma sakala-ura-antarajāmī ||
अस समुझत मन संसय होई । कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई ॥
जे निज भगत नाथ तव अहहीँ । जो सुख पावहिँ जो गति लहहीँ ॥
asa samujhata mana saṃsaya hoī | kahā jo prabhu pravāna puni soī ||
je nija bhagata nātha tava ahahīm̐ | jo sukha pāvahim̐ jo gati lahahīm̐ ||
सोइ-सुख सोइ-गति सोइ-भगति, सोइ निज चरन-सनेहु ।
सोइ-बिबेक सोइ-रहनि प्रभु, हमहिँ कृपा करि देहु ॥
soi-sukha soi-gati soi-bhagati, soi nija carana-sanehu |
soi-bibeka soi-rahani prabhu, hamahim̐ kṛpā kari dehu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0