स्वायंभू-मनु अरु सतरूपा । जिन्ह तेँ मइ नर सृष्टि अनूपा ॥
दम्पति धरम-आचरन नीका । अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका ॥
svāyaṃbhū-manu aru satarūpā | jinha tem̐ mai nara sṛṣṭi anūpā ||
dampati dharama-ācarana nīkā | ajahum̐ gāva śruti jinha kai līkā ||
5 श्लोक · 142 में से 361
स्वायम्भुव मनु और शतरूपा, जिनसे यह अनुपम मनुष्य सृष्टि हुई, धर्म के आचरण में उत्तम दम्पति थे। वेद आज भी उनकी मर्यादा गाते हैं। उनके पुत्र राजा उत्तानपाद थे, जिनके पुत्र ध्रुव हरि के भक्त हुए। छोटे पुत्र का नाम प्रियव्रत था, जिनकी वेद और पुराण प्रशंसा करते हैं। उनकी पुत्री देवहूति मुनि कर्दम की प्रिय पत्नी हुईं, जिनके गर्भ में आदिदेव, दीनदयालु, कृपालु कपिल भगवान आए। उन्होंने सांख्य शास्त्र प्रकट किया और वे तत्त्व विचार में निपुण थे। मनु ने बहुत काल तक राज्य किया और सब प्रकार प्रभु की आज्ञा का पालन किया। फिर भी घर में रहते रहते चौथापन आ गया और विषयों से वैराग्य न हुआ। हृदय में बड़ा दुख हुआ कि हरिभक्ति के बिना जन्म बीत गया।
स्वायंभू-मनु अरु सतरूपा । जिन्ह तेँ मइ नर सृष्टि अनूपा ॥
दम्पति धरम-आचरन नीका । अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका ॥
svāyaṃbhū-manu aru satarūpā | jinha tem̐ mai nara sṛṣṭi anūpā ||
dampati dharama-ācarana nīkā | ajahum̐ gāva śruti jinha kai līkā ||
नृप उत्तानपाद सुत तासू । ध्रुव हरि-भगत भयउ सुत जासू ॥
लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही । बेद पुरान प्रसंसहिँ जाही ॥
nṛpa uttānapāda suta tāsū | dhruva hari-bhagata bhayau suta jāsū ||
laghu suta nāma priyrabrata tāhī | beda purāna prasaṃsahim̐ jāhī ||
देवहूति पुनि तासु कुमारी । जो मुनि-कर्दम के प्रिय नारी ॥
आदिदेव प्रभु दीनदयाला । जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला ॥
devahūti puni tāsu kumārī | jo muni-kardama ke priya nārī ||
ādideva prabhu dīnadayālā | jaṭhara dhareu jehiṃ kapila kṛpālā ||
सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना । तत्व बिचार निपुन भगवाना ॥
तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला । प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला ॥
sāṃkhya sāstra jinha pragaṭa bakhānā | tatva bicāra nipuna bhagavānā ||
tehiṃ manu rāja kīnha bahu kālā | prabhu āyasu saba bidhi pratipālā ||
होइ न बिषय बिराग, भवन बसत भा चौथ पन ।
हृदयँ बहुत दुख लाग, जनम गयउ हरिभगति बिनु ॥
hoi na biṣaya birāga, bhavana basata bhā cautha pana |
hṛdayam̐ bahuta dukha lāga, janama gayau haribhagati binu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0